झांसी। स्वराज अभियान के संस्थापक योगेंद्र यादव के नेतृत्व में बुंदेलखंड में सूखे के आकलन को चलाए जा रहे सर्वेक्षण कार्य की रिपोर्ट अब दिवाली बाद सार्वजनिक होगी। सोमवार को रिपोर्ट पूर्ण होने के बाद अब इसका विश्लेषण कार्य शेष रह गया है।
बुंदेलखंड में इन दिनों किसानों की बदहाली मुद्दा बना हुआा है। अब तक 31 किसानों की मौत पर सरकार की बेरुखी से किसानों में भारी आक्रोश है। इसको आंदोलन के रूप में बदलनेे के लिए आप के पूर्व नेता और स्वराज अभियान के संस्थापक योगेंद्र यादव बुंदेलखंड में सक्रिय हैं।
उनके द्वारा अपने स्वयं सहयोगियों को लगाकर केंद्र व राज्य सरकारों से मिलने वाली आर्थिक मदद, सूखे के असर, पेयजल संकट, जानवरों के चारे, रोजगार, पलायन, पोषण अथवा खाद्यान्न की वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिए स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद से सर्वेक्षण कराया जा रहा है।
इसके लिए बुंदेलखंड के सातों जनपदों के दो सौ गांवों और 30 तहसीलों को शामिल किया गया है। सर्वेक्षण कार्य के जरिए यह भी जानने की कोशिश की जा रही है कि सरकारों द्वारा दी जाने वाले राशन, मनरेगा योजना, फसलों का मुआवजा, बीमा का किसानों को कितना लाभ मिल रहा है।
इसके साथ ही किसानों के परिवार के सदस्यों की शैक्षणिक योग्यता व कमाई का स्रोत भी रिपोर्ट में उल्लेखनीय है। झांसी आए योगेंद्र यादव ने सर्वेक्षण कार्य शुरू करते हुए दिवाली से पहले रिपोर्ट सार्वजनिक करने की बात कही थी, लेकिन तीन जनपदों बांदा, चित्रकूट और महोबा में सर्वे का कार्य धीमा हो जाने से ऐसा नहीं हो सका।
इस संबंध में जब योगेंद्र यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सोमवार को सर्वेक्षण पूर्ण हो गया है। अब इसकी एंट्री कराने के बाद विश्लेषण किया जाएगा। 20 नवंबर से पहले रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाएगी। बुंदेलखंड के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर यानी दिल्ली में पत्रकारों के समक्ष सर्वे की वस्तुस्थिति सार्वजनिक होगी।