पंचकुइयां के जादूनाथ का हाता के सामने माँ काली की मूर्ति बनाकर पूजा करते अजय रायकवार। अमर उजाला
झांसी। दीपावली पर महानगर में अमावस्या की मध्य रात्रि में मां काली की विशेष पूजा होगी। 14 नवंबर को शहर कालीबाड़ी में मां काली की मूर्ति विराजमान की जाएगी। जबकि सीपरी कालीबाड़ी परिसर के काली मंदिर में हर साल की तरह पूजा अनुष्ठान होंगे। बंगाली समाज के सदस्यों ने इस विशेष धार्मिक कार्यक्रम के लिए तैयारियां पूरी कर ली है।
सनातन धर्म में मां काली की पूजा का विशेष महत्व है। बंगाली समाज की शहर काली बाड़ी में पिछले 64 सालों से दीपावली पर अमावस्या की रात मां काली की पूजा होती आ रही है। बांधव समिति के पूर्व सचिव देवाशीष चटर्जी और समिति के सांस्कृतिक सचिव रविशंकर चटर्जी ने बताया कि 14 नवंबर को दीपावली पर अमावस्या की तारीख सुबह 11:15 बजे से लग जाएगी। मूर्ति विराजमान कर रात को प्राण प्रतिष्ठा एवं अन्य धार्मिक कार्य रात 10:30 बजे से शुरू होगा, जो मध्य रात 3 बजे तक होगी। इसे बंगाली समाज श्यामा पूजा कहते है। मां को खिचड़ी, मौसमी सब्जियों व मिठाइयों का प्रसाद अर्पण होता है। 15 नवंबर को दर्पण विसर्जन के बाद शाम 4 बजे विधिवत मां की मूर्ति कालीबाड़ी के कुंड में विसर्जित की जाएगी। इधर सीपरी कालीबाड़ी एसोसिएशन के सचिव प्रियांशु डे ने बताया कि दीपावली पर अमावस्या की मध्य रात्रि कालीबाड़ी परिसर के काली मंदिर में पूजा उत्सव होगा और कुम्हैड़ा की बलि दी जाएगी।