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बेटी नैंसी की मौत से टूट गया था अरविंद, लोगों से मिलना जुलना कर दिया था बंद

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disappointment
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झांसी। अरविंद पांडेय चिरगांव में एक पेट्रोल पंप पर बायोमेट्रिक पंप बिक्री का छोटा सा कारोबार करता था। अरविंद के एक बेटी नैंसी और बेटा नैतिक थे। अट्ठारह साल की नैनसी इंटर में पढ़ रही थी। फरवरी में एग्जाम से पहले अचानक तबियत बिगड़ी और मौत हो गई। बेटी की मौत के बाद अरविंद टूट गया और लोगों से मिलना जुलना बंद कर दिया। यहां तक की दुकान भी नहीं खोल रहा था। घर वालों ने और दोस्तों ने काफी समझाया मगर वह बेटी के सदमे से उबर नहीं पाया।
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अरविंद पांडेय के परिवार वाले और दोस्तों का कहना है कि बेटी से बहुत प्यार करता था। हमेशा बेटी को लेकर ही वह जिक्र किया करता था। बेटी को पढ़ा लिखाकर बड़ा अफसर बनाने का ख्वाब देख रहा था। बेटी की हर इच्छा को पूरी करता था। बेटी की मौत के बाद लोगों ने उसे काफी समझाया। यहां तक कहा कि कुछ दिनों के लिए परिवार के साथ कहीं घूम आए लेकिन वह कहीं गया ही नहीं। घर से बाहर निकलना भी बंद कर दिया था। वह लगातार डिप्रेशन में घिरता चला गया। दोस्तों का कहना है कि जब भी उससे बात करते थे बस बेटी को लेकर रोने लगता था। कभी कहता है कि मुझे बेटी के पास जाना है तो कभी कहता कि मेरी बेटी मुझे रोज सपने में आती है। रेखा भी हमेशा बेटी को याद करके बिलखती रहती थी। पुलिस ने इनके घर से जो सुसाइड नोट बरामद किया है उसमें लिखा भी है वह बेटी के बिना रह नहीं पा रहे हैं।
मौत के बाद भी मनाया था बेटी का जन्मदिन, काटा गया केक
झांसी। अरविंद पांडेय ने मौत के बाद भी अपनी बेटी नैंसी का जन्मदिन मनाया था। फरवरी में बेटी की मौत हुई थी और उसके एक-दो महीने बाद जन्मदिन था। बेटी का जन्मदिन पर बाकायदा केक काटा गया था। बेटी की तस्वीर लगाकर जन्मदिन की मुबारकबाद दी गई थी। जन्मदिन की कई दिन तैयारियां की गईं थीं। परिवार वालों ने बताया कि हर साल बेटी का जन्मदिन मनाता था अरविंद। बर्थडे पर बेटी को अच्छे उपहार भी लाकर देता था।
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रात को मकान की छत पर बैठकर बच्चों के साथ खेली थी लूडो
झांसी। बृहस्पतिवार की रात करीब 10 बजे अरविंद ने खाना खा लिया था और बाद में अपने बेटे नैतिक और भतीजे ध्रुव और कृष्णकांत के साथ मोबाइल पर लूडो खेला था। उस वक्त जिस तरह अरविंद बच्चों को साथ खेल रहा था कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि वह इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठा लेगा। परिवार वालों का कहना है कि ऐसा कुछ लग ही नहीं रहा था।
रात भर नहीं सोए थे अरविंद और रेखा
झांसी। बृहस्पतिवार की रात को करीब ग्यारह बजे तक अरविंद को देखा गया है। उसके बाद वह अपने कमरे में चला गया था। सुबह भोर में पांच बजे दंपती का बेटा नैतिक चिल्लाता हुआ कमरे से बाहर आया था। इससे साफ है कि दंपती रात भर सो नहीं पाए। जो सुसाइड नोट मिला है उस पर भी दोनों के नाम है। ऊपर अरविंद पांडेय का नाम है तो नीचे रेखा का।
आर्थिक तंगी से भी गुजर रहा था परिवार
झांसी। मुहल्ले वालों का कहना है कि बेटी की मौत के बाद से गहरे में सदमे में था अरविंद। काम-धंधा भी नहीं चल रहा था। इससे आर्थिक स्थिति भी बुरी तरह से लड़खड़ा गई थी। इसका भी जिक्र उसने अपने साथियों से किया था। बताया जाता है कि पहले वह मोंठ में एक पेट्रोल पंप पर काम करता था लेकिन बाद में यहां नौकरी छोड़ दी थी। दो साल पहले गांव सिमथरी में बायोडीजल का लाइसेंस लेकर काम शुरू किया था। लेकिन वह काम भी चल नहीं सका। परिवार में भी उसकी नहीं पटती थी। घर वाले भी उससे नाराज रहते थे। बेटी की मौत के बाद वह शराब भी पीने लगा था। जिसका घर वाले विरोध भी करते थे।
जहां बेटी की अस्थियां विसर्जित हुईं वहीं उनकी की जाएं
झांसी। अरविंद पांडेय ने सुसाइड नोट में लिखा था कि उन तीनों का अंतिम संस्कार एक साथ किया जाए। ओरछा में अस्थियां विसर्जित करने की भी इच्छा व्यक्त की गई थी। परिवार वालों ने बताया कि अरविंद ने अपनी बेटी नैंसी की अस्थियां भी ओरछा में ही विसर्जित की थीं। इसलिए उसने अपनी अंतिम इच्छा यह व्यक्त की है।
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