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झांसी में एक ही दिन में दोगुना हुआ वायु प्रदूषण

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झांसी। लॉकडाउन के दौरान बाजार खुलने की छूट मिलते ही सड़कों पर वाहनों के फर्राटा भरने से झांसी में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) एक ही दिन में दोगुना हो गया। शुक्रवार को झांसी का एक्यूआई 107 रिकॉर्ड किया गया, जबकि अब तक ये 55 के आसपास हुआ करता था। यह स्थिति स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील लोगों के लिए परेशानी बढ़ाने वाली है। यदि ऐसे ही वाहन दौड़ते रहे तो आने वाले दिनों में एक्यूआई और बढ़ने की संभावना है।
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कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के शुरुआती तीन चरणों में फैक्ट्रियां, काम-धंधे बंद होने की वजह से लोग घरों में कैद थे। ऑटो, बस, ट्रक, लोडर समेत निजी वाहन के पहिए थमे हुए थे। इस कारण जिले का एक्यूआई घटकर 50 से 55 के बीच बना हुआ था। शासन की ओर से छूट मिलने के बाद लॉकडाउन की वजह से 57 दिनों की बंदी के बाद बृहस्पतिवार से महानगर के बाजार खुल गए। हालांकि, अभी 31 मई तक सभी दुकानें एक साथ नहीं खुलेंगी। अलग-अलग ट्रेड के कारोबार के लिए अलग-अलग दिनों का रोस्टर जिला प्रशासन की ओर से जारी किया गया है। कारोबार की समयसीमा भी सुबह आठ से शाम पांच बजे तक निर्धारित की गई। इस छूट की वजह से लॉकडाउन के पहले जैसा माहौल बृहस्पतिवार को देखने को मिला। सड़कों पर वाहनों की भीड़ से निकलने वाला धुआं और तेज हवाओं के साथ उड़ने वाली धूल ने एक ही दिन में झांसी के एक्यूआई को दोगुना कर दिया। शुक्रवार को जिले में एक्यूआई 107 रहा। जानकारों ने बताया कि यदि ऐसे ही वाहन दौड़ते रहे तो आगे आने वाले दिनों में एक्यूआई और बढ़ सकता है।
वायु प्रदूषण के ये हैं कारण
- वाहनों से निकलने वाला धुआं।
- औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं व रसायन।
- आणविक संयत्रों से निकलने वाली गैस तथा धूल-कण।
- पेड़-पौधे, कोयले, कचरा आदि जलाने से।
- ढाबों पर भट्ठियों से निकलने वाली राख।
प्रदूषण बढ़ने से होने वाले रोग
- अस्थमा, श्वसनतंत्र की शिथिलता
- दिल का दौरा आने का खतरा
- कैंसर, एलर्जी, खांसी, आंखों में जलन
- नजर का कमजोर हो जाना
- मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर असर होना
ये हैं आंकड़े
मेडिकल जनरल द लैंसेट में प्रकाशित वर्ष 2010 के डाटा पर आधारित एक अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार समय पूर्व होने वाली मृत्यु के लिए वायु प्रदूषण दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वजह बन गई है। वहीं, अमेरिका स्थित हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट और इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवेल्यूएशंस की ओर से जारी स्टे ऑफ ग्लोबल एयर 2019 रिपोर्ट के अनुसार दूषित वायु धूम्रपान से भी ज्यादा मौतों का कारण बन रही है। भारत में वायु प्रदूषण से 2017 में 12 लाख मौतें हुई हैं। यह मौतें बाहरी, घरेलू वायु और ओजोन प्रदूषण का मिलाजुला नतीजा है।
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