झांसी। डीजल शेड में इलेक्ट्रिक इंजनों में बड़े मरम्मत कामों (मेजर शिड्यूल) की शुरूआत 2022 से करेगा। इसके पहले डीजल शेड में नई ओएचई लाइन व मरम्मत पिट बनाने का काम होगा। यहां पर अभी प्राथमिक इलेक्ट्रिक इंजनों की मरम्मत शुरू कर दी गई है। रेलवे डीजल इंजनों का प्रयोग धीरे- धीरे खत्म करता जा रहा है।
रेल मंडल में कुछ साल पहले तक दिल्ली- भोपाल मुख्य ट्रैक पर ही इलेक्ट्रिक इंजनों से ट्रेनें दौड़तीं थीं। झांसी- कानपुर, झांसी- मानिकपुर व भीमसेन- बांदा ट्रैक पर ओएचई लाइन नहीं थी। इन सेक्शनों में डीजल इंजन की मदद से ही ट्रेनें व मालगाड़ियां चलाईं जातीं थीं। इसके लिए मंडल के पास 125 डीजल इंजन हैं, जिनकी मरम्मत के लिए झांसी में डीजल शेड बना है। मगर, अब मंडल के सभी सेक्शनों में विद्युतीकरण हो गया है।
इलेक्ट्रिक इंजन से ईंधन की आधी खपत होती है। दूसरा इंजनों की उम्र भी 35 साल होती है, उस हिसाब से भी रेल मंडल के अधिकांश इंजन बूढ़े होते जा रहे हैं। यही कारण है कि रेलवे धीरे- धीरे डीजल इंजन का प्रयोग बंद करता जा रहा है। डीजल शेड में भी इलेक्ट्रिक इंजनों की मरम्मत शुरू कर दी गई है। इलेक्ट्रिक शेड के पास 240 इंजन हैं, जिसमें 25 इंजन मरम्मत के लिए डीजल शेड को दे दिए गए हैं। अभी डीजल शेड में इलेक्ट्रिक इंजनों की प्राथमिक मरम्मत शुरू हो गई है। यहां पर इलेक्ट्रिक इंजनों में मेजर काम 2022 से शुरू होंगे। इसके पहले डीजल शेड में नई ओएचई लाइन व मरम्मत पिट बनाने का काम होगा।
- डीजल शेड को अभी 25 इलेक्ट्रिक इंजन प्राथमिक मरम्मत के लिए दिए गए हैं। यहां पर अभी ओएचई लाइन व मरम्मत पिट बनाने का काम हो रहा है। फरवरी 2022 से इस शेड में इलेक्ट्रिक इंजनों में मेजर काम शुरू हो जाएंगे।