झांसी। सुबह के वक्त पड़ रही धुंध के कारण ट्रेनों की रफ्तार पर तेज नहीं हो पा रही है। शनिवार को 20 से अधिक ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से आईं। वहीं, सर्दी से बचने के लिए मुसाफिर वेटिंग रूम में दुबके रहे। जो यात्री प्लेटफार्म पर बैठे रहे, उनके लिए ट्रेन का इंतजार पल- पल भारी रहा।
अभी सुबह के वक्त कोहरा पड़ना तो शुरू नहीं हुआ है, लेकिन ठंड जरूर बढ़ गई है। साथ ही, धुंध भी रहने लगी है। शनिवार को धुंध के कारण कई ट्रेनों की रफ्तार थमी रही। इस कारण 19666 साबरमती एक्सप्रेस डेढ़ घंटे, 12177 चंबल एक्सप्रेस दो घंटे, जबलपुर अटारी एक्सप्रेस दो घंटे, 12627 कर्नाटका एक्सप्रेस चार घंटे, 12542 लोकमान्य तिलक गोरखपुर एक्सप्रेस पांच घंटे, 12189 महाकौशल एक्सप्रेस पांच घंटे, 12707 तिरुपति संपर्क क्रांति डेढ़ घंटे, 22868 निजामुद्दीन दुर्ग हमसफर एक्सप्रेस दो घंटे देरी से झांसी आई। गाड़ी नंबर 11080 गोरखपुर लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस गोरखपुर से पांच घंटे देरी से रवाना हुई। इस ट्रेन के सात घंटे देरी से झांसी आने की उम्मीद थी। ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण यात्रियों को वेटिंग रूम और प्लेटफार्म पर बैठकर वक्त गुजारना पड़ा। सुबह के वक्त दैनिक यात्री भी गंतव्य तक पहुंचने के लिए परेशान रहे।
गतिमान एक्सप्रेस में भी कंफर्म नहीं हो रही सीट
सर्दी में मुसाफिर एसी कोचों में सफर करने को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। हाल यह है कि झांसी से निजामुद्दीन जाने वाली गतिमान एक्सप्रेस में भी वेटिंग कंफर्म नहीं हो पा रही है।
बुंदेलखंड के यात्रियों को दिल्ली की तरफ जाना हो तो दोपहर 3.05 बजे जाने वाली गतिमान एक्सप्रेस और 3.20 बजे जाने वाली ताज एक्सप्रेस बेहद सुविधा जनक मानी जाती हैं। इन ट्रेनों में अंतिम वक्त तक कंफर्म टिकट मिल जाता है। ताज एक्सप्रेस का किराया सामान्य होने के कारण अधिकांश मुसाफिर इससे जाना ज्यादा पसंद करते हैं। जबकि, गतिमान एक्सप्रेस वीआईपी गाड़ियों में शुमार है। आम दिनों में इस ट्रेन में वेटिंग का टिकट आसानी से कंफर्म हो जाता है, मगर इन दिनों सर्दी के चलते इस गाड़ी में वेटिंग के टिकट तक कंफर्म नहीं हो पा रहे हैं। यात्री सर्दी से बचने के लिए ज्यादा किराया देने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
बसें भी चल रहीं लेट
सर्दी के चलते रात में लखनऊ से आने और जाने वाली रोडवेज की बसों ने भी एक से दो घंटे देरी से आना शुरू हो गया है। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक एसके राय ने बताया कि कोहरे में अधिक रोशनी के लिए अधिकांश बसों में बेदर बल्ब लगा दिए गए हैं। साथ ही जिन बसों के कांच टूटे हैं उनको दुरुस्त कराने के बाद ही चलाने के निर्देश दिए गए हैं।