बानपुर। किले के मैदान में श्रीराम लीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में सातवें दिन केवट संवाद प्रस्तुति दी गई। भरत मिलाप की लीला देख भक्तों की आंखें भर आईं।
श्रीराम की भेंट भक्त केवट एवं निषाद राज से होती है, जो प्रभु श्री राम को गंगा पार कराते हैं। राम लक्ष्मण और सीता चित्रकूट पहुंचते हैं, जहां वह अत्रि ऋषि और माता अनसुइया से मिलते हैं और सती अनसुइया माता सीता को पति भक्ति का ज्ञान देती हैं। इधर, अयोध्या में जब सुमंत निराश होकर लौटते हैं, तब महाराज दशरथ के दुख की सीमा नहीं रहती और वह राम के वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। यह समाचार जब राजकुमार भरत और शत्रुघ्न को प्राप्त होता है तब उन्हें भी असहनीय पीड़ा होती है। वह श्रीराम को वापस अयोध्या लाने का निर्णय लेते हैं। चित्रकूट पहुंचने पर राम एवं भरत मिलाप देख दर्शक भावविभोर हो जाते हैं। इस दौरान सूर्पणखा की नाक कान काटने के साथ ही खर एवं दूषण वध की लीला का मंचन किया गया। इंद्रजीत सिंह गौर, डॉ अमित भट्ट, कल्लू राजा, अनीश खान, बल्लू सोनी, कपिल जैन सराफ, दिलीप सिंह, रमेश झा, चाली राजा, मुलायम सिंह राय आदि मौजूद रहे।