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देवताओं की दिवाली पर रहेगा चंद्र ग्रहण का साया

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झांसी। महानगर में देव दिवाली का त्योहार 30 नवंबर को कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन देवता दिवाली मनाते हैं। ऐसे में श्रद्धालु तालाबों और मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। हालांकि, इस बार देव दिवाली पर चंद्र उपच्छाया ग्रहण का साया रहेगा। लेकिन भारत में इसका असर नहीं होगा। मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे।
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कार्तिक माह की अमावस्या की तरह कार्तिक की पूर्णिमा का भी विशेष धार्मिक महत्व है। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी क हा जाता है। श्रद्धालु तालाबों एवं मंदिरों को रोशनी से जगमग करते हैं। इससे भगवान विष्णु और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। खास बात यह है कि इस त्योहार पर वर्ष 2020 का आखिरी चंद्रग्रहण पड़ने जा रहा है। हालांकि यह उपच्छाया ग्रहण होगा। इसका प्रभाव भारत में नहीं होगा। पंडित शांतनु पांडेय ने बताया कि उपच्छाया चंद्र ग्रहण दोपहर 1 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा। इसका मोक्ष 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। ऐसे में इसका कोई सूतक मान्य नहीं है। यह ग्रहण वृषभ राशि व रोहिणी नक्षत्र में लग रहा है। इसका मानवीय जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पडे़गा। शुभ कार्य बराबर जारी रहेंगे। त्योहार पर सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। भगवान की पूजा अर्चना से विशेष लाभ प्राप्त होगा।
तुलसी जू, शालिग्राम विवाह आज, गणेश पूजा हुई
देव उठनी एकादशी पर तुलसी जू और भगवान शालिग्राम जी का विवाह होता है। ऐसे में कई घरों और मंदिरों में विवाह कार्य के लिए तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मंगलवार को कारगिल पार्क के हनुमान जी मंदिर परिसर में मंडप सजाया गया और गणेशजी की पूजा की गई। तेल व हल्दी सहित विवाह की अन्य रस्में भी निभाई गईं। महिला श्रद्धालुओं ने संगीत की मधुर धुनों पर वैवाहिक गीत गाए। कार्यक्रम में लल्लन महाराज, विजय शास्त्री, आशु मित्तल, अलका मित्तल, विजित कपूर आदि श्रद्धालु रहे। मंदिर में बुधवार अन्य वैवाहिक कार्यक्रम होंगे।
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रक्सा पुनावली में गूंज रहे कार्तिक के गीत
झांसी। ग्रामीण इलाकों में इन दिनों कार्तिक माह का उत्साह है। महिलाएं व बालिकाएं ब्रह्म मुहूर्त से ही तालाबों पर स्नान करने व दान के लिए उमड़ रही हैं। कलश पर दीपक लेकर भगवान श्री कृष्ण की भक्ति के गीत गा रही हैं। इससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय हो गया है। रक्सा पुनावली में कार्तिक माह में पूजा के लिए भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। भोर से ही ब्रज के गीत गूंजने लगते हैं। जलाशयों पर स्नान एवं पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।
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