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इच्छा ‘ए’ ग्रेड की, व्यवस्था ‘बी’ ग्रेड भी नहीं

Thu, 29 Sep 2016 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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bu, jhansi news - फोटो : demo
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे का लक्ष्य राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की टीम से ए ग्रेड लेने का है, लेकिन विश्वविद्यालय के कई संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। इन समस्याओं को दूर किए बिना नैक से ए ग्रेड मिलना मुश्किल है। नैक की टीम का दौरा नवंबर में प्रस्तावित है।
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ए ग्रेड हासिल करने के लिए कुलपति प्रो. दुबे आए दिन बैठकें कर अधीनस्थों को नियमित दिशा-निर्देश दे रहे हैं। वह लैबों को उपयोगी बनाने, पानी, सफाई, शौचालय आदि की व्यवस्था दुरुस्त करने को कह रहे हैं। साथ ही डीन तथा विभागाध्यक्षों को अपनी प्रोफाइल विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करने, नियमित क्लासें चलाने को भी कह रहे हैं। लेकिन, ऐसा हो नहीं पा रहा है। विश्वविद्यालय से जुड़े कई महाविद्यालयों में तो नियमित कक्षाएं भी नहीं चलती हैं।

वीसी के निर्देश नजरअंदाज
कुलपति ने दो माह पहले नियमित शिक्षकों को बीयू की वेबसाइट पर अपना बायोडाटा अपलोड करने को कहा था। इंस्टीट्यूट आफ अर्थ साइंस, जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान, इंस्टीट्यूट आफ बायोमेडिकल साइंस, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इंस्टीट्यूट आफ फोरेंसिक साइंस एंड क्रिमनोलॉजी, इंस्टीट्यूट आफ फाइन आर्ट के शिक्षकों ने तो अपना बायोडाटा वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। लेकिन, इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडी, इंस्टीट्यूट आफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट, इंस्टीट्यूट आफ फूड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट आफ आर्किटेक्चर एंड टाउन प्लानिंग, इंस्टीट्यूट आफ होम साइंस, डाक्टर अंबेडकर इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस, भाषा संस्थान आदि विभागों के किसी शिक्षक ने अपना बायोडाटा अपलोड नहीं किया है। उन्होंने शिक्षकों को अपने केबिन के बाहर नेमप्लेट लगवाने को कहा था, जिसे भी पूरा नहीं किया।
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ये हैं मानक
- मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो
- प्रयोगात्मक शिक्षा नियमित हो 
- सुरक्षा कर्मी पर्याप्त संख्या में हो
- पानी, साफ-सफाई जैसी सुविधाएं दुरुस्त हो  

बीयू की स्थिति 
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन चिकित्सकाें की कमी। सुबह नौ बजे से एक बजे तक डेंटिस्ट रहते हैं। एक से पांच बजे तक बंद रहने के बाद शाम पांच से रात नौ बजे तक एक चिकित्सक रहते हैं।
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- कई विभागों मेें लैब नहीं हैं। जहां लैब है तो वहां पर अटेंडेंट, केमिकल और उपकरण नहीं है। कुछ लैब के उपकरण खराब पड़े हैं।
- बीस से तीस प्रतिशत सुरक्षा कर्मियों की कमी नहीं है। इसी कारण कई बार स्टेट बैंक के बगल वाला गेट बंद करना पड़ता है।
- पानी पीने के लिए कुछ विभागों के छात्र दूसरे विभागों में जाते हैं। इसके अलावा विभागों में नियमित साफ-सफाई नहीं होती है।

विश्वविद्यालय में जो भी कमियां है, उन्हें जल्द दूर कर लिया जाएगा। 
 प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलपति
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