झांसी। कोरोना काल में झांसी के लोगों ने देशी मास्क बनाकर खूब बेचे। इससे कोविड से झांसी वासियों को बचाने में काफी मदद मिली। वहीं, कामधंधा बंद हो जाने की वजह से मास्क बनाकर लोगों ने स्वरोजगार शुरू कर कमाई भी की।
कोविड के चलते लॉकडाउन के कारण तमाम कारोबार ठप हो गए थे। कइयों का धंधा भी बंद हो गया था। इसी बीच, कई लोगों ने हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहने के बजाए इस आपदा को अवसर के तौर पर लिया। समय की मांग के अनुसार बड़ी संख्या में मास्क बनाना शुरू कर दिए। बेहतर गुणवत्ता वाले मास्क का अधिक उत्पादन होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला, वहीं, क्षेत्रवासियों को अपनी रक्षा के लिए सस्ते और अच्छे मास्क मिले। इससे महंगे मास्क बनाने वाली नामचीन विदेशी कंपनियों की मॉनोपॉली टूटी। बाजार में टिके रहने के लिए मजबूरन उन्हें भी कीमत कम करनी पड़ीं। 200 रुपये वाला जो एन-95 मास्क बाजार में बमुश्किल मिल रहा था, उसका मूल्य 80 रुपये रह गया है। वहीं, 10 रुपये में बिकने वाला थ्री लेयर मास्क दो से तीन रुपये में मिलने लगा।
केस-1
सीपरी बाजर के लक्ष्मण ने भी कोविड के दौरान हजारों मास्क सिल कर बेचे। उन्होंने महज 10 रुपये का एक मास्क बनाकर दिया। अगर कोई जरूरतमंद हुआ तो उसे मुफ्त में भी दे दिया। झांसी के मास्क बुंदेलखंड भर में खूब बिके।
केस-2
सीपरी बाजार के ही अनिल साड़ी में फॉल और पीको काम करते थे। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया। इसे उन्होंने 20 रुपये से 30 रुपये तक में बेचा। उनके मास्क लोग ने खूब पसंद भी किए।
स्वयं सहायता समूह भी बनाने लगे थे मास्क
जिले में मास्क की मांग बढ़ी तो स्वयं सहायता समूहों को भी मास्क बनाने का काम मिला। जिले में अब तक 117 स्वयं सहायता समूहों की 243 महिलाओं ने तीन लाख से भी ज्यादा मास्क बनाए। इन मास्क को जिले के तमाम विभागों के साथ कई औद्योगिक संस्थानों में दिया गया है। जेल, पुलिस लाइन, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान आरसेटी ने भी मास्क बनाने का ऑर्डर दिया।