स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को झांसी के दो और निजी अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। टीम के निरीक्षण में खामियां सामने आने पर देशबंधु और गीता मेमोरियल हॉस्पिटल का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। दोनों ही अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वह मरीजों को भर्ती न करें। साथ ही ये निर्देश दिया गया कि जो मरीज भर्ती हैं, उन्हें अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया जाय।
शासन ने नर्सिंग होमों के लिए प्रारूप तय किया है। स्वास्थ्य विभाग को बायोमेडिकल वेस्ट, स्टाफ, पंजीकृत डॉक्टर, स्टाफ की उपलब्धता, नक्शा, फायर फाइटिंग सिस्टम समेत कई बिंदुओं पर जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम कई अस्पतालों का निरीक्षण कर रही है। दो मार्च को टीम ने मेडिकल कॉलेज गेट नंबर एक के सामने स्थित गीता मेमोरियल हॉस्पिटल और वीरांगना नगर स्थित देशबंधु हॉस्पिटल का निरीक्षण किया।
देशबंधु हॉस्पिटल में बीएएमएस डॉक्टर उपस्थित मिले। फायर फाइटिंग सिस्टम का एनओसी, जेडीए से स्वीकृत नक्शा, बायोमेडिकल वेस्ट का एनओसी और एमपीपीसी का एनओसी प्रपत्र नहीं दिखाए गए। हॉस्पिटल के बेसमेंट में कैंटीन स्थापित थी और मरीजों के लिए खाली बेड रखे हुए थे। सभी जगह गंदगी व्याप्त थी। भौतिक निरीक्षण में लेटर पैड पर लिखी सुविधाएं भी नहीं मिलीं। मरीजों की केस हिस्ट्री अपूर्ण मिली। इसके अलावा भी तमाम खामियां सामने आईं।
वहीं, गीता मेमोरियल अस्पताल के निरीक्षण के दौरान टीम को मूल अभिलेख भी नहीं दिखाए गए। कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। बाद में ऑनकॉल डॉक्टर को पैरामेडिकल स्टाफ ने बुलाया। स्टाफ कोई भी अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका। मरीजों की केस हिस्ट्री देखने पर पाया गया कि डॉक्टर द्वारा किसी भी तरह टिप्पणी उस पर दर्ज नहीं की गई। जो भी हिस्ट्री मरीजों की देखी, वो अपूर्ण मिली। यहां पर भी कई अन्य खामियां मिलीं। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने दोनों ही अस्पतालों का लाइसेंस निरस्त कर दिया है।