घाटे से जूझ रहे बिजली विभाग को उबारने के लिए केंद्र सरकार की उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। योजना में दो सौ यूनिट से अधिक खपत वाले घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने थे। इसके अलावा और भी सुधार के काम होने थे।
प्रदेश सरकार ने अरबों के बिजली घाटे में चलने के बाद भी वर्ष 2016 से शहरी क्षेत्रों को 22 घंटे व ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे बिजली देने का दावा कर रही हैं। घाटे का प्रमुख कारण दी गई बिजली के बदले उतना ही राजस्व न मिल पाना है। इसमें सबसे बड़ी वजह लाइन लॉस व चोरी का न रुक पाना है। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार यह योजना लाई है, ताकि हर घर को बिजली मिल सके। जैसे कि वर्तमान में केंद्र सरकार की स्काडा योजना के अंतर्गत एक दर्जन से अधिक शहरों में विद्युत ढांचे को दुरुस्त किया जा रहा है। इनमें झांसी भी शामिल है, यहां 237 करोड़ के बजट से काम चल रहा है।
इसी तरह केंद्र सरकार इस सत्र में उज्ज्वल डिस्कॉम इंश्योरेंस योजना लेकर आने वाली थी, इसकी तैयारी एक साल पहले की गई थी। योजना के तहत प्रति माह दो सौ यूनिट से अधिक खपत वाले घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने थे, जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से होनी थी। स्मार्ट मीटर का बिल कंट्रोल रूम से ही जारी होता और एसएमएस के जरिये उपभोक्ता के पास बिल पहुंच जाता। स्मार्ट मीटर में चोरी करने की संभावना नहीं है। दूसरा, बकाया होने पर कंट्रोल रूम से ही कनेक्शन काट दिया जाता।
‘उदय योजना पर अभी कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। केंद्र से जब योजना साकार रूप लेगी, तभी उस पर कोई काम शुरू हो सकेगा।’
पंकज अग्रवाल, अधिशासी अभियंता (द्वितीय)।