फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दीप पर्व का शुभारंभ आज से

Mon, 09 Nov 2015 12:35 AM IST
ब्यूराे
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव क शुभारंभ सोमवार धनतेरस से हो जाएगा, जो शुक्रवार भइया दूज तक रहेगा। इन दिनों धार्मिक माहौल में लोग आत्मिक एवं भौतिक जीवन की खुशियों पर सवार रहेंगे।
विज्ञापन


आज जगत का स्वास्थ्य कल्याण करेंगे भगवान धनवंतरि
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर भगवान धनवंतरी जी का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। समुद्र मंथन के दौरान भगवान धनवंतरि सभी जीवों के  स्वास्थ्य कल्याण के लिए औषधि कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस पावन दिवस भगवान धनवंतरि का पूजन सायं पांच से सात बजे तक के मध्य होगा। क्योंकि इस मध्य चित्रा नक्षत्र रहेगा जो मानव को स्वस्थ रखने की दृष्टि से लाभकारी है। इस पवित्र दिन को धनतेरस भी कहते हैं। लोग सोना, चांदी, स्टील आदि धातुओं से बने पात्र एवं आभूषण खरीदते हैं। इसके लिए शुभ मुहूर्त सायं पांच बजे से रात्रि 10:40 बजे तक है।

छोटी दीपावली पर दूर करें ऊपरी बाधाएं
धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुदर्शी पर भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। लोग इस खास दिन को छोटी दिवाली भी मानते हैं। वहीं तंत्र शास्त्र के अनुसार इस दिन चौराहे पर दीपक रखकर पीछे की ओर बिना देखे तथा हाथ पैर धोकर घर में प्रवेश करें, इससे न सिर्फ घर से ऊपरी बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि मानव को नरक का कष्ट भी नहीं भोगना पड़ता है। वहीं घर के सामने सरसों के तेल से 21 दीपक श्रृंखलाबद्ध प्रज्ज्वलित करने से जीवन सुखमय रहता है।
विज्ञापन


सिर्फ दो घंटे नहीं रहेगा शुभ मुहूर्त
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला मुख्य पर्व दीपावली पर मां लक्ष्मी एवं गणेश का विशेष पूजन किया जाता है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के मुताबिक व्यापारी वर्ग प्रात: सात बजे से दस बजे तक लाभ अमृत बेला में गद्दी की स्थापना आदि करें। वहीं गृहस्थ एवं व्यापारी लक्ष्मी व गणेश का पूजन सायं 5:30 बजे से 10: 30 बजे के मध्य करें।

इसके बाद सिंह लग्न रात्रि 12:30 मिनट से मध्य रात्रि 2:50 बजे तक रहेगा, जो पूजन की दृष्टि से शुभकारी है। उनके अनुसार रात्रि 10:30 बजे से 12:30 बजे के मध्य शुभ मुहूर्त नहीं है। वहीं पूजन अवधि के दौरान विसाखा नक्षत्र, सौभाग्य व चंचल योग होने से बुधादित्य योग भी बनेगा। इससे पूजन कार्य एवं मां लक्ष्मी की पूजा सार्थक होगी।
 
गोधूलि बेला में गोवर्धन की करें पूजा
कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है। सायं गोधूलि बेला में गाय के गोबर से गोवर्धन जी की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करें तथा नए अन्न को कूट कर मौसमी सब्जियों, बाजरा, चावल, मूंग आदि के मिश्रण का प्रसाद अर्पण करें। इससे घर धन्य धान्य से भरपूर रहेगा।

भाई के साथ भाभी ले आशीष बहन से
महंत जी के अनुसार पांच दिवसीय दीपावली उत्सव के आखिरी चरण में यम द्वितीया (भईया दूज) पर भाई-बहन किसी भी पवित्र नदी पर जाकर स्नान करें। इस दौरान भाभी अपनी ननद को वस्त्र प्रदान कराएं तो उसे सुखमय जीवन की प्राप्ति रहती है। वहीं बहन द्वारा तिलक व पूजन करने के पश्चात भाई को आशीर्वाद दे। यह पर्व यमराज व उनकी बहन यमुना के प्रेम को प्रदर्शित करता है। इस पावन दिन बहन कभी भी अपने भाइयों को तिलक कर सकती है।

बुंदेली संस्कृति में अनूठा है दीपमाला उत्सव
झांसी। दीपावली पर्व का समाज में विशेष महत्व है। बुंदेलखंड के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस पर्व को अनूठे तरीके से मनाया जाता है।

धनतेरस पर जहां लोग धातुओं के बरतन के अलावा चांदी के सिक्के आदि खरीदते हैं, वहीं नरक चतुदर्शी को बुंदेली भाषा में जमघट की रात कहते हैं। यमराज के दिवस के रूप में पहचान रखने वाले इस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में जादू, टोटका करने वाले गुनिया एकजुट होते हैं। इस दौरान सांप व अन्य जहरीला कीड़े द्वारा काटने का इलाज भी यह गुनिया करते हैं।

बुंदेली संस्कृति के जानकार हरगोविंद कुशवाहा के मुताबिक दीपावली पर ग्रामीण अंचल में लोग गाय, कुत्ता आदि जानवरों को विभिन्न रंगों से ठप्पा लगाकर रंगते हैं। इस दिन गाय अथवा किसी भी जानवर का दूध पीना निषेध है। वहीं प्रतिपदा के दिन गाय के गोबर से निर्मित गोवर्धन की पूजा के दौरान उसक ी नाभि में दूध अथवा चावल रखा जाता है, जो घर का छोटा बच्चा ग्रहण करता है। वहीं इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित मंदिरों में मौनिया नृत्य दल के सदस्य जुटते हैं और मौन साधकर 12 गांवों के लिए निकल पड़ते हैं। इस दौरान मौनिया नृत्य दल के सदस्य पानी आदि को विचित्र तरीके से पीते हैं।

दीप उत्सव के आखिरी दिन भाई दूज पर प्रात: घर की महिलाएं एकत्र होकर मूसल से चुगलखोरों को डांटने के लिए मंत्र पढ़ती हैं। यानि इस दौरान वह घर की नजर उतारती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें