झांसी। एक साल से अपने दो भाइयों के साथ जेल में बंद मोंठ थाना इलाके की बुढ़ावली ग्राम सभा के पूर्व प्रधान रहीस यादव की मंगलवार की सुबह मौत हो गई। दोपहर में डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। वहीं, मृतक के पिता ने हत्या की आशंका जताई। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खासी भीड़ जमा रही। तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा।
एससी/एसटी एक्ट और गैंगेस्टर एक्ट के मामले में बुढ़ावली के पूर्व ग्राम प्रधान रहीस यादव (35) को 22 जुलाई 2020 को जेल भेजा गया था। इसी मामले में उनके दो भाई शिवशंकर उर्फ बबलू और हरीशंकर उर्फ मोंटी को भी जेल भेजा गया था। तब से तीनों भाई जेल में ही निरुद्ध थे। जेल प्रशासन के अनुसार मंगलवार की सुबह तकरीबन साढ़े चार बजे रहीस यादव को सांस लेने में परेशानी हुई। इसकी जानकारी होने पर तत्काल जेल के डॉक्टर को बुलाया गया। डॉक्टर की सलाह पर रहीस को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना कर दिया गया। मेडिकल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसकी सूचना गांव में उनके परिजनों को दी गई, जिससे कोहराम मच गया।
बैरक में बंद उसके दो भाइयों के करुण क्रंदन से पूरा जेल गूंज उठा। पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर भारी संख्या में परिजनों व ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी हो गई। इसी बीच मृतक के पिता उदयनारायण यादव ने पुत्र की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रहीस एकदम स्वस्थ था। कुछ दिन पहले इंटरकॉम के जरिये उससे बात भी हुई थी, जिसमें उसने स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या भी नहीं बताई थी। अचानक मौत संशय पैदा करती है। उन्होंने जांच की मांग की। तनाव को देखते हुए पोस्टमार्टम हाउस के बाहर सीओ सिटी राजेेश कुमार सिंह और थाना कोतवाली व नवाबाद की पुलिस पहुंच गई। तीन डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। इसकी वीडियोग्राफी कराई गई। मौत की वजह हृदयघात बताई जा रही है।
जेल में रहकर लड़ाया था पत्नी को चुनाव
झांसी। रहीस यादव का क्षेत्र में खासा दबदबा था। इसी के बलबूते पर उसने 2015 में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा था, जिसमें आसानी से जीत दर्ज कर ली थी। हाल ही में हुए चुनाव के दौरान वो अपने भाइयों के साथ जेल में बंद था। बावजूद, उसने अपनी पत्नी मोहिनी यादव को चुनाव लड़ाया था, जो महज 64 वोटों के अंतर से हारी।
जमानत पर 26 को होनी थी सुनवाई
झांसी। रहीस यादव को एससी /एसटी एक्ट तथा गैंगेस्टर एक्ट तहत जेल भेजा गया था। एससी/एसटी एक्ट में उसे जमानत मिल गई थी। जबकि, गैंगेस्टर एक्ट में जमानत पर सुनवाई 26 जुलाई को होनी थी, लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो गई।
अंतिम संस्कार के लिए पेरोल मांगी
झांसी। रहीस यादव अपने दो सगे भाइयों के साथ एक साल से जेल में बंद था। उसकी मौत के बाद पिता की ओर से अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जेल में बंद दो अन्य पुत्रों को पेरोल देने की मांग की गई, जिसके चलते मृतक का देर रात तक अंतिम संस्कार भी नहीं किया गया। देर रात तक पेरोल को लेकर कोई फैसला भी नहीं हो पाया।