झांसी। आज की बेटियां हर क्षेत्र में बेटों से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। इन दिनों सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर में आत्मरक्षा एवं मुक्केबाजी का प्रशिक्षण ले रही हैं।
सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट कार्यकारिणी समिति की ओर से 10 दिवसीय आत्मरक्षा एवं मुक्केबाजी का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। 50 बालक एवं बालिकाएं इसमें शामिल हैं। प्रशिक्षणार्थियों ने बताया कि वे खुद को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण ले रहे हैं। शिविर में बालिकाओं को शारीरिक व्यायाम, पंच करना, डिफेंस करना, फुटवर्क, आत्मरक्षा एवं मुक्केबाजी की तकनीकी जानकारी के अलावा खानपान के बारे में बताया जा रहा है। कुछ ऐसी खिलाड़ी हैं, जो मुक्केबाजी की अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का सपना देख रही हैं।
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ये बोलीं मुक्केबाज ...
मुक्केबाजी शिविर में पंच करना, स्ट्रेट पंच, फुटवर्क के साथ स्वयं रक्षा करने के उपाय सीखने का मौका मिला है। मुक्केबाजी की इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूं। - पूनम रायकवार, मुक्केबाज
बचपन से ही मुक्केबाजी करने का शौक है। शिविर में मुक्केबाजी के तरीके, नियम, शारीरिक व्यायाम एवं आत्मरक्षा करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल जीतना चाहती हूं। - नैना सिंह, मुक्केबाज
शिविर में बच्चों को खेल के नियम व बारीकियां, व्यायाम एवं स्वयं की रक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। - देवेंद्र सिंह, एनआईएस कोच, बॉक्सिंग रेफरी