झांसी। 19 फरवरी को हुए गोलीकांड के बाद मंगलवार को पहली बार बुंदेलखंड महाविद्यालय खुला। इक्का-दुक्का छात्र-छात्राएं ही कॉलेज पहुंचे। सभी के चेहरे पर घबराहट दिख रही थी। हर कोई खौफजदा था। कक्षाओं में भी सन्नाटा पसरा रहा। दो-तीन छात्र पढ़ाई करने पहुंचे भी तो क्लास खत्म होने के बाद तुरंत कॉलेज से निकल गए।
बीकेडी में बीते शुक्रवार को छात्र मंथन सिंह सेंगर ने हुकुमेंद्र सिंह गुर्जर कोे क्लास में गोली मार दी थी। इसके बाद मंथन ने गोंदू कंपाउंड स्थित चाणक्यपुरी कॉलोनी में रहने वाली छात्रा कृतिका त्रिवेदी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। नई दिल्ली एम्स में चले इलाज के दौरान हुकुमेंद्र ने भी दम तोड़ दिया था। घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने तीन दिन के लिए कॉलेज बंद कर दिया था। मंगलवार को कॉलेज खुला लेकिन पहले जैसी रौनक नजर नहीं आई। हाल ये रहा कि इक्का-दुक्का छात्र-छात्राएं ही पहुंचे। जो मैदान छात्र-छात्राओं से गुलजार रहता था, वहां सन्नाटा पसरा रहा। वहीं, कुछ विद्यार्थियों के साथ तो परिजन भी कॉलेज आए। जिस कमरे में गोली चली थी, वहां जाने से हर कोई बच रहा था। हाल ये रहा कि उस कमरे में तो ताला लटका ही रहा, उस बिल्डिंग में भी कोई क्लास नहीं हुई।
ये बोले छात्र, अभिभावक, शिक्षक
गोलीकांड के बाद दहशत हो गई है। कॉलेज में बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बेटी बीए में पढ़ाई करती है, इसलिए उसके साथ आया हूं। - अरविंद सिंह, अभिभावक।
कॉलेज का माहौल कुछ शिक्षक बिगाड़े हैं। यहां खुलेआम गुंडागर्दी होती है। इसी का परिणाम है कि यहां इतनी बड़ी वारदात हो गई। पुलिस से भी शिकायत की है। - डॉ. अनुपमा सोनी, शिक्षिका।
घटना के आधे घंटे पहले हुकुमेंद्र से मिला था। अब यकीन ही नहीं हो रहा है कि वो हमारे बीच में नहीं है। घटना के बाद कॉलेज में डर का माहौल हो गया है। - मो. परवेज, छात्र।
कभी सोचा नहीं था कि शिक्षा के मंदिर में इतनी बड़ी वारदात हो जाएगी। घटना के बाद हर कोई दहशत में है। बड़ी हिम्मत जुटाकर आज कॉलेज आया हूं। - विवेक सिंह, छात्र।
सुबह जब कॉलेज आ रहा था तो परिजन काफी डरे हुए थे। कॉलेज आने के बाद फोन करके भी पूछताछ की है। पढ़ाई खत्म होते ही घर आने के निर्देश दिए हैं। - कपिल गुप्ता, छात्र।
कई दोस्तों से फोन पर बात की है। गोलीकांड के बाद अभिभावकों ने उन्हें कॉलेज भेजने से ही मना कर दिया। कहा कुछ दिन नहीं जाओगे तो फेल नहीं हो जाओगे। - रवींद्र, छात्र।
कॉलेज आना ही नहीं चाहता था मगर सोचा कि परीक्षाएं नजदीक हैं तो चला आया। बिल्कुल अलग माहौल मिला। हर तरफ सिर्फ सन्नाटा पसरा हुआ है। - नितिन सोनी, छात्र।
पहली बार कॉलेज आते समय अभिभावकों के चेहरे पर दहशत साफ नजर आ रही थी। अभिभावकों ने कहा कि ध्यान रखना। किसी से भी झगड़ा नहीं करना। - सुमित वर्मा, छात्र।
परिजनों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी लड़की से बात करने की जरूरत नहीं है। किसी को दोस्त भी न बनाओ। सिर्फ पढ़ाई करो और घर लौट आओ। - मनीष कुमार, छात्र।