प्रदेश के कई जिलों में कहर बरपाने वाले खतरनाक संक्रमण स्क्रब टाइफस की झांसी में भी दस्तक हो गई है। अब तक जिले में वायरल बुखार और डेंगू ही कहर बरपा रहा था लेकिन इस कड़ी में एक नए रोग का नाम जुड़ गया है, वो है स्क्रब टाइफस। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हुई जांच में दो मरीजों में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है। डॉक्टर इसे डेंगू से भी ज्यादा खतरनाक बीमारी बता रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर इलाज न कराना मरीज की जान पर आफत साबित हो सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक स्क्रब टाइफस मुख्य रूप से माइट्स (घुन जैसे छोटे कीट) के काटने के कारण होने वाली बीमारी है। साफ-सफाई की कमी के कारण यह कीट उत्पन्न हो सकता है। इसके काटने पर लोगों में स्क्रब टाइफस की बीमारी का खबरा बढ़ जाता है। समय पर इलाज न कराने पर संक्रमित व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। अब इस बीमारी के मरीज झांसी में भी मिलने शुरू हो गए हैं।
लक्षण
संक्रमित कीट के काटने के दस दिनों के अंदर इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। रोगियों को बुखार और ठंड लगने के साथ सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द की समस्या हो सकती है। जिन स्थान पर कीट ने काटा होता है, वहां पर त्वचा का रंग गहरा हो जाता है। त्वचा पर पपड़ी पड़ सकती है। कुछ लोगों को त्वचा पर चकत्ते भी नजर आ सकते हैं। समस्या बढ़ने के साथ रोगियों में भ्रम से लेकर कोमा तक की समस्या हो सकती है। गंभीर स्थिति में अंग खराब होने और रक्तस्त्राव हो सकता है।
बचाव के उपाय
स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए अभी तक कोई टीका नहीं है। ऐसे में बचाव ही सबसे प्रभावी तरीका है। लोगों को संक्रमित माइट्स के संपर्क में आने से बचना चाहिए। जंगलों, झाड़ वाले इलाकों में यह कीड़े अधिक हो सकते हैं। ऐसे में ऐसी जगहों पर जाने से बचें। यदि आपको कोई भी कीड़ा काट ले तो तुरंत साफ पानी से उस हिस्से को धोकर एंटीबायोटिक दवाएं लगा लें। ऐसे कपड़े पहनें, जिससे हाथ-पैर अच्छी तरीके से ढके रह सकें।
प्राचार्य ने बुलाई इमरजेंसी बैठक, इलाज में डॉक्सीसाइक्लिन कारगर
पहली बार स्क्रब टाइफस के मरीज मिलने के बाद से हड़कंप की स्थिति है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने सोमवार को डॉक्टरों की इमरजेंसी बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि यदि इस बीमारी का तनिक भी अंदेशा हो और जांच रिपोर्ट नहीं आई हो तो भी इलाज शुरू कर दें। उन्होंने बताया कि इस संक्रमण के इलाज में डॉक्सीसाइक्लिन बेहद कारगर दवा है। डेंगू और स्क्रब टाइफस के लक्षण मिलते-जुलते होते हैं। इसीलिए मेडिकल कॉलेज ने किट मंगवाकर इसकी जांच शुरू करा दी है।