झांसी। पथरई व लखेरी बांध के डूब क्षेत्र के प्रभावित किसानों ने कई सालों बाद भी मुआवजा न मिलने पर शुक्रवार से सिंचाई विभाग के बेतवा भवन कार्यालय प्रांगण में बुंदेलखंड किसान पंचायत के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। हालांकि, अधिशासी अभियंता ने किसानों से वार्ता कर आठ दिन का समय मांगा, इसके बावजूद किसानों ने मांगें पूरी होने तक कार्यालय में ही डटे रहने का निर्णय लिया।
धरने का नेतृत्व कर रहे पंचायत के अध्यक्ष गौरी शंकर बिदुआ ने कहा कि पथरई व लखेरी बांध का निर्माण कार्य 2007- 08 में पूरा कर लिया गया था, लेकिन किसानों के बालिग परिवारों को अनुकंपा राशि एवं पेड़, बंधी, कुआं आदि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। उनकी मांग है कि पथरई बांध के प्रभावित ग्राम विजयगढ़, मजरा, बगरौनी, इमिलिया के किसानों के बालिग परिवारों को अनुकंपा राशि एवं प्लाट वितरित की जाए। लखेरी बांध में प्रभावित ग्राम रेवन के डूब क्षेत्र में प्रभावित किसानों का सर्वे कराया जाए तथा प्रभावित किसानों को पेड़ बंधी, कुआं, मकान एवं बालिग परिवार को अनुकंपा राशि एवं मुआवजा दिया जाए।
उक्त दोनों बांधों को पूर्ण क्षमता के साथ भरा जाए, ताकि संबंधित क्षेत्र के किसानों को सिंचाई का लाभ मिल सके व पहूज बांध के डूब क्षेत्र में 100 वर्षों से चली आ रही किसानों की भूमिधरी जमीन का मुआवजा देने की मांग की। धरने के दौरान सिंचाई विभाग पंचम खंड के अधिशासी अभियंता कमलेश्वर सिंह ने दो बार किसानों से मुलाकात कर उन्हें शीघ्र मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके लिए उन्होंने किसानों ने आठ दिन का समय मांगा। उनके जाने पर किसानों ने आठ दिन तक लगातार धरने को जारी रखने का निर्णय लिया। देर रात तक किसानों का धरना जारी था। धरने में देवी सिंह कुशवाहा, राम सिंह जादौन, शंभू रायकवार, मुकेश पटेल, हरीश खरे, बाबूलाल पाल, मुन्ना यादव, हेमंत त्रिपाठी, रवि विश्वकर्मा, राहुल गुप्ता, कांशीराम कुशवाहा, गनपत पाल, अखिलेश गुप्ता आदि किसान मौजूद रहे।