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सावधान रहें, लॉटरी निकलने का लालच देकर की जा रही है ठगी

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झांसी। लॉटरी में बाइक व पचास हजार रुपये का लालच देकर शहर के लोगों को ठगा जा रहा है। साइबर अपराधी लुभावने सपने दिखाकर ओटीपी हासिल कर उनके खाते से रुपये निकाल रहे हैं। तीन माह में 75 से अधिक लोगों से लाखों की ठगी की जा चुकी है। सभी मामलों में साइबर थाना पुलिस जांच कर रही है।
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हेलो मैं कंपनी का अधिकारी बोल रहा हूं, आप को खुशखबरी देनी है। आप का मोबाइल नंबर लकी साबित हुआ है। आप एक बाइक व पचास हजार रुपये जीत गए हैं। पिछले दिनों ऐसी ही कॉल कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले मनीराम के पास आई तो वह खुशी से झूम उठे। ठग ने कहा कि उन्हें आयकर के रूप में दस हजार रुपये जमा करने होंगे। इसके एवज में उनसे कहा गया कि मोबाइल पर एक ओटीपी नंबर आएगा। उक्त नंबर बताते ही खाते से दस हजार रुपये निकाल लिए। मेसेज आने के बाद उनको ठगी का शिकार होने की जानकारी मिली।
ऐसा ही प्रेमनगर क्षेत्र निवासी वसीम के साथ हुआ, उनके पास भी कॉल आई। इनाम जीतने का लालच देकर खाते की जानकारी व ओटीपी नंबर लेकर 12 हजार रुपये निकाल लिए। उनको बताया गया कि शाम तक कंपनी का अधिकारी आपके घर पहुंचेगा, वह इंतजार ही करते रहे। उनके पास भी मेसेज आने के बाद ठगी का पता चला। उन्होंने साइबर थाना पुलिस से शिकायत की है।
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केस नंबर 1
कोतवाली के डड़ियापुरा निवासी सिद्धार्थ को फोन आया कि लकी ड्रा में मोबाइल नंबर शामिल किया गया है। बाइक व तीन लाख रुपये के लालच में आकर ओटीपी नंबर बताते ही 18 हजार रुपये निकल गए।
केस नंबर 2
शिवाजी नगर निवासी संजीव सिंह भी लकी ड्रा के नाम पर ठगी का शिकार हो गए। उनको भी बाइक व तीन लाख रुपये का लालच देकर ओटीपी हासिल कर 8 हजार रुपये खाते से निकाल लिए।
हासिल कर रहे डाटा
- अगर आप अपना कार्ड स्क्रैच करने के लिए किसी और को दे देते हैं (पेट्रोल पंप, मॉल) तो वह इसकी क्लोनिंग कर सकता है।
- एटीएम बूथ में लगे जासूसी कैमरे की मदद से भी कार्ड का डाटा चुराया जा सकता है। यह काम आईपॉड से भी हो सकता है।
- कभी-कभी क्लोनिंग करने वाले एटीएम बूथ में कार्ड इंसर्ट करने की जगह एक कार्ड रीडर लगा देते हैं। इससे भी क्लोनिंग होती है।
यह बरतें सावधानी
- पेट्रोल पंप, होटल, मॉल आदि में कार्ड स्क्रैच खुद ही करें। किसी को न दें।
- एटीएम बूथ मशीन में कार्ड इंसर्ट करने से पहले प्वाइंट को थोड़ा पकड़ कर देख लें, कहीं रीडर तो फिट नहीं है।
- अपना पिन नंबर बदलते रहें। ट्रांजेक्शन होने के बाद की बोर्ड पर क्लीयर बटन को जरूर दबाएं।
फोन कॉल पर किसी को भी खाते से लेकर ओटीपी की जानकारी न दें। बैंक किसी भी तरह के ओटीपी नंबर हासिल नहीं करता है। ऐसी आने वालीं अनजान कॉल से सतर्क रहें। ऐसे मामलों मेें साइबर थाना पुलिस के साथ-साथ संबंधित थाने की पुलिस भी जांच कर रही है। विवेक कुमार त्रिपाठी, एसपी सिटी, नोडल अधिकारी-साइबर थाना
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