झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए लागू किए गए कर्फ्यू का रविवार को झांसी में खासा असर देखने को मिला। महानगर के प्रमुख बाजार, मार्ग और चौराहे दिन भी सन्नाटे के आगोश में डूबे रहे। इक्का- दुक्का लोगों की आवाजाही ही देखने को मिली। सुबह और शाम के समय पुराने शहर के अंदरूनी इलाकों में थोड़ी चहल-पहल जरूर रही। लेकिन, दोपहर में वहां भी सभी अपने घरों में बैठे रहे।
संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए सरकार की ओर से शनिवार की रात आठ बजे से सोमवार की सुबह सात बजे तक के लिए 35 घंटे का कर्फ्यू लागू किया गया था। रविवार को सुबह से ही इसका असर नजर आने लगा था। दूध की दुकानें खुली रहीं और विक्रेता घर-घर आपूर्ति में जुटे रहे। बाकी ऑटो नहीं चले और चाय - पान की गुमटियों में भी ताले लटके रहे। दोपहर में महानगर एकदम सन्नाटे के आगोश में समा गया। सड़कों, बाजारों और चौराहों पर एकदम सन्नाटा पसरा रहा। इक्का- दुक्का लोगों की ही आवाजाही नजर आई। उन्हें भी पुलिस की रोक- टोक का सामना करना पड़ा। हालांकि, पुराने शहर के अंदरूनी इलाकों में कुछ चहल - पहल रही। गली - मुहल्लों की छोटी - मोटी दुकानें खुली रहीं। उधर, नुक्कड़ों पर बेपरवाह लोग आपस में गप्पें लड़ाते नजर आए।
यात्री हुए परेशान, नहीं मिला साधन
झांसी। कर्फ्यू के दौरान रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर बाहर से आने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी। ऑटो बंद होने की वजह से उन्हें अपने घर तक पहुंचने का कोई साधन नहीं मिला। ऐसे में लोगों को पैदल ही घर तक पहुंचना पड़ा। तेज धूप में पैदल चलते हुए यात्री पसीने से लथपथ हो गए। तमाम लोग अपने निजी साधनों से बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से घर पहुंचे।