अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। क्रशर उद्योग की सांसें झांसी में फूल रही हैं। मध्य प्रदेश से मिल रही चुनौती का सामना यह कारोबार नहीं कर पा रहा है। स्थिति यह है कि भाव में अंतर होने की वजह से मध्य प्रदेश की गिट्टी की यहां खूब खपत हो रही है। लगातार हो रहे नुकसान की वजह से क्रशर संचालकों के पैर उखड़ने लगे हैं। जबकि झांसी से सटे मध्य प्रदेश के इलाकों में तेजी से नए क्रशर लग रहे हैं।
क्रशर उद्योग को झांसी के प्रमुख उद्योगों में माना जाता रहा है लेकिन अब यह स्थिति नहीं रही। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कभी क्रशर की संख्या बढ़कर एक सैकड़ा के करीब पहुंच गई थी लेकिन अब बमुश्किल 60 क्रशर ही यहां बचे हैं। पूंछ क्षेत्र के परेछा में एक क्रशर है जबकि चिरगांव क्षेत्र के रामनगर गांव में छह क्रशर चल रहे हैं। मध्य प्रदेश के क्रशरों ने प्रदेश में अपने पैर जमा लिए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह सरकारी नीतियों की वजह से यहां बढ़े हुए भाव हैं।
नियमानुसार यहां गिट्टी का बेसिक रेट 160 रुपये क्यूबिक मीटर है। जबकि, मध्य प्रदेश में यह दर 100-125 रुपये है। दामों के अंतर की वजह से मध्य प्रदेश की गिट्टी यहां आकर भी सस्ती पड़ रही है। यह वजह है कि वहां की गिट्टी की खूब खपत हो रही है। ऐसे में यहां का क्रशर उद्योग लगातार मंदी की चपेट में आता जा रहा है।
राजस्व का भी हो रहा नुकसान
चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकार ने झांसी जनपद को 374 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह का लक्ष्य दिया है, लेकिन खनिज विभाग अब तक 140 करोड़ रुपये हासिल कर पाया है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में दो माह ही शेष हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में भी यह स्थिति रही। पिछले साल विभाग को 340 करोड़ वसूलने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन विभाग 234 करोड़ रुपये ही हासिल कर पाया था।
मप्र की गिट्टी से मिल रहा राजस्व
मध्य प्रदेश से आने वाली गिट्टी से झांसी में खनिज विभाग को अच्छा राजस्व मिल रहा है। प्रतिमाह चार से पांच करोड़ रुपये का राजस्व विभाग को हासिल हो रहा है।
वर्जन
झांसी में क्रशर उद्योग की मंदी के कई कारण हैं। मप्र की गिट्टी यहां के मुकाबले सस्ती तो पड़ ही रही है, साथ ही गुणवत्ता के मामले में भी वह यहां से बेहतर साबित हो रही है। हालांकि, सरकार की ओर से क्रशर उद्योग को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके परिणाम भी देखने को मिलेंगे। - - भूपेंद्र यादव, जिला खान अधिकारी
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टैक्स और रॉयल्टी अधिक होने की वजह से झांसी का क्रशर उद्योग मध्य प्रदेश के सामने खड़ा नहीं हो पा रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि यहां गिट्टी की पर्याप्त उपलब्धता के बाद भी मप्र की गिट्टी यहां खप रही है। हम अपना माल अपने प्रदेश में भी नहीं बेच पा रहे हैं। इसके लिए शासन से काफी लिखा-पढ़ी की जा चुकी है। बावजूद, ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि, क्रशर उद्योग रोजगार का भी एक बड़ा केंद्र है। - धीरज खुल्लर, महासचिव- बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज