झांसी। अब गिरोहबंद अधिनियम या फिर गैंगस्टर एक्ट लगाने के लिए जिले की पुलिस को सर्टिफिकेट देना होगा। इस बात की तस्दीक करनी होगी कि संबंधित अपराधी या गैंग के खिलाफ किसी अन्य थाने से गैंगस्टर की कार्रवाई या फिर इसका अनुमोदन तो नहीं किया गया है।
अपराधियों पर प्रदेश के कुछ थानों में दो जगहों से गैंगस्टर लगने का मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमा सतर्क हो गया है। ऐसे में शासन ने डीएम व एसएसपी को निर्देश जारी किए हैं। अब तक कई बार एक ही प्रवृत्ति के अपराध करने वाले अपराधी या गैंग के खिलाफ पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की संस्तुति करती थी। एसएसपी के जरिए मिले प्रस्ताव पर डीएम की सहमति के बाद गैंगस्टर की कार्रवाई शुरू की जाती थी। नई व्यवस्था में ऐसा नहीं हो सकेगा। अब थानेदार को गैंगस्टर की कार्रवाई की संस्तुति के साथ ही प्रमाण पत्र देना होगा कि संबंधित गैंग या अपराधी के खिलाफ इसी मामले में किसी अन्य थाने से गैंगस्टर की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। प्रमाण पत्र देने के बाद ही गैंगस्टर की कार्रवाई की जा सकेगी।
यह है गैंगस्टर एक्ट
गैंगस्टर एक्ट या गिरोहबंदी अधिनियम पुलिस का एक कारगर हथियार है। इस एक्ट में गिरोह या अपराधी के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज होता है। एक्ट की कई धाराओं और उपधाराओं के तहत आरोपी की संपत्ति पर कुर्की, बैंक खाते सीज कराने आदि के प्रावधान हैं।
थानों में देनी होगी हाजिरी
गैंगस्टर के आरोपी को जेल से छूूटने के बाद थानों में भी हाजिरी देनी होगी। जानकारी ली जाएगी कि वह कहां रह रहा है और प्रतिदिन की दिनचर्या की जानकारी भी पुलिस को देनी होगी। हर पंद्रह दिन में थाने पर हाजिर होकर पूरी जानकारी थानेदार को देनी होगी।