झांसी। पुलिस की अपराधियों पर लगातार कार्रवाई ने जेल की टेंशन को बढ़ा दिया है। दस दिन के भीतर 65 से अधिक आरोपियों के जेल भेजने से जिला कारागार में बंदियों की संख्या और बढ़ गई है।
वर्तमान में जिला कारागार की क्षमता 450 कैदियों की है। लेकिन, अभी 1200 से अधिक बंदी हैं। लगभग तीन गुना बंदी होने के कारण जेल प्रशासन के सामने चौबीस घंटे चुनौती बनी रहती है। मानक से स्टाफ की कमी और क्षमता से ज्यादा बंदियों के होने की वजह से जेल की सुरक्षा को भी खतरा रहने लगा है। उधर, जिले की पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। कच्ची शराब के कारोबार से लेकर वारंटियों की धरपकड़ के लिए अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में जेल में चैन से बंदी सो भी नहीं पा रहे हैं। ज्यादातर बंदियों को जैसे-तैसे रात गुजारनी पड़ती है।
अस्थाई जेल में कोरोना बंदी मिलने के बाद अलर्ट
हाफिज सिद्दीकी नेशनल इंटर कॉलेज की अस्थाई जेल में कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के बाद जिला कारागार में भी अलर्ट कर दिया गया है। ऐसे में ओवरलोड जेल होने के चलते फिर से कोरोना का डर बंदियों को सताने लगा है। अब सतर्कता बरतते हुए अस्थाई जेल में बैरकों को सैैनिटाइज किया जा रहा है। साथ ही बंदियों के रहने व खाने पीने का अलग से ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।
व्यवस्था ठीक रखने की बनी रहती चुनौती
क्षमता से ज्यादा बंदियों का बोझ ढो रही जिला जेल में संगीन धाराओं के कैदी भी बंद हैं। ऐसे में सीमित सुरक्षा संसाधनों के बीच इनकी सुरक्षा और निगरानी जेल प्रशासन के लिए चुनौती भरा होता है। यह गैंग न बना लें, इसको लेकर भी अलग से टीम नजर रखती है।
क्षमता से अधिक बंदी होने के बाद भी जेल प्रशासन पूरी नजर बनाए हुए है। हर समय यहां व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहती हैं। चौबीस घंटे बंदियों पर नजर रखी जा रही है। कोरोना को लेकर भी जेल में पूरी तरह अलर्ट है। प्रतिदिन जेल को सैनिटाइज किया जा रहा है। रंग बहादुर, वरिष्ठ जेल अधीक्षक