विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट सुशील कुमार ने बयान बदलने पर अलग-अलग मामलों में दो महिलाओं तीन-तीन माह के कारावास और पांच सौ रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता वीके राजपूत ने बताया कि 19 जुलाई 2012 को एक महिला ने रिपोर्ट कराई थी कि पांच जुलाई को वह खरीददारी करने गई थी। कोतवाली थानांतर्गत बड़ागांव गेट बाहर निवासी हेमंत उसे अपने तीन साथियों के साथ जबरन जंगल में ले गए, जहां उसके साथ बलात्कार किया। उसकी फोटो खींची और फिर बदनाम करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया। तीन अक्तूबर 2016 को पीड़िता अपने बयान से पलट गई, जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया। मंगलवार को सुनाए गए फैसले में कोर्ट ने रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला को तीन महीने की सजा और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता वीके राजपूत ने बताया कि इसी अदालत ने मंगलवार को एक और अहम फैसला सुनाया। उन्होंने बताया कि सदर बाजार के सिघर्रा गांव निवासी हाजिरा बेगम ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि नौ नवंबर 2014 में सदर बाजार की पब्लिक पार्क के पास भट्टागांव निवासी नसीर व नदीम ने उसे गोली मारी। 26 अक्तूबर 2016 को हुए बयान में वह बदल गईं। इस पर कोर्ट ने हाजिरा बेगम के खिलाफ धारा 344 में कार्रवाई करते हुए तीन माह की सजा और पांच सौ रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
चरस रखने के मामले में दो साल की सजा
विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट सुशील कुमार ने मंगलवार को 250 ग्राम चरस के साथ पकड़े गए व्यक्ति को दो साल के कारावार व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता वीके राजपूत ने बताया कि चार अप्रैल 2005 को नवाबाद थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर बजरंग कालोनी में 250 ग्राम चरस के साथ प्रेमनगर पुलिया नंबर नौ निवासी ध्रुव लाल को गिरफ्तार किया था। इस मामले में अदालत ने ध्रुव लाल को दो साल की सजा व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
गैंगेस्टर एक्ट में दो को सात-सात साल की सजा
विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर एक्ट महेंद्र सिंह ने गैंगेस्टर एक्ट के आरोपियों को सात-सात साल के कारावास व 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एसपीओ राजपाल कैथल ने बताया कि ईशा गढ़ कोट बेहटा निवासी संजू यादव व अनिल यादव का संगठित गिरोह है, जो समाज में भय फैला रहे हैं। इस मामले में अदालत ने दोनों आरोपियों को 2/3 गिरोह बंद अधिनियम के तहत सात-सात साल की सजा सुनाई। 50-50 रुपये अर्थदंड देना होगा। अर्थदंड नहीं देने पर छह-छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।