जिला जज अतुल कुमार गुप्ता और अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अजय कृष्ण विश्वेस ने मादक पदार्थ तस्करी के मामले में दो आरोपियों को 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अर्थदंड भी लगाया है, जिसे अदा नहीं करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) मनीष सिंह यादव ने बताया कि आठ जुलाई 2008 को जीआरपी प्लेटफार्म नंबर एक पर चेकिंग कर रही थी, तभी पुलिस ने नंदनपुरा सीपरी बाजार निवासी मनोज कुमार को पकड़ा था। तलाशी लेने पर उसके पास से 530 ग्राम चरस बरामद हुई। इस मामले की सुनवाई के बाद जिला जज अतुल कुमार गुप्ता ने मनोज को 10 साल के सश्रम कारावास और 75 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक साल अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
वहीं, सहायक शासकीय अधिवक्ता महेंद्र सिंह ने बताया कि 23 मई 2003 को जीआरपी ने हैदराबाद से दिल्ली जा रही सदर्न एक्सप्रेस के कोच नंबर एस-आठ की सीट नंबर 27-28 पर बैठे कुष्ठ आश्रम नंद नगरी सीमापुरी नई दिल्ली निवासी बाबू खां और खतीसा बेगम के सामान की तलाशी ली। तलाशी में दोनों के पास से 50-50 किलो गांजा बरामद हुआ। मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला सत्र न्यायाधीश प्रथम अजय कृष्ण विश्वेस ने बाबू खां को 10 साल का सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक साल अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान खतीसा फरार हो गई।