झांसी। बड़ागांव थाना क्षेत्र के जौरी बुजुर्ग में हुई सत्येंद्र की हत्या पत्नी ने अपने प्रेमी व उसके दोस्त के साथ मिल कर की थी। वह शराबी पति से छुटकारा पाना चाहती थी। इस मामले में पुलिस ने तीनों हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
ग्यारह जनवरी को जौरी बुजुर्ग निवासी हरी सिंह का पुत्र सतेंद्र (32) पत्नी सविता के साथ खेत पर पानी लगाने गया था। दिन ढलने के बाद पत्नी ने घर आकर परिजनों को बताया था कि सतेंद्र के पेट में तेज दर्द हो रहा है। जब परिजन खेत पर पहुंचे तो वहां सत्येंद्र का शव पड़ा था।
परिजन शव लेकर घर आ गए थे। इसी दौरान परिवार के कुछ लोगों ने सत्येंद्र की गर्दन पर नाखूनों के निशान देखे। उन्होंने शव को गौर से देखा तो सत्येंद्र की पीठ व कमर पर भी नोचने-खसोटने के निशान थे। यह देख कर उनको अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद मृतक के पिता ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। परिजनों ने हत्या का शक मृतक की पत्नी व उसके प्रेमी पर जताया था। बृहस्पतिवार को पुलिस ने हत्या में शामिल पत्नी सविता, गांव में ही रहने वाले उसके प्रेमी भूपेंद्र राजपूत पुत्र घनश्याम राजपूत व उसके दोस्त टहरौली थाना क्षेत्र के ग्राम वेला बसारी निवासी अखिलेश पुत्र द्वारिका प्रसाद राजपूत को गिरफ्तार कर लिया।
बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन सभागार में इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि सविता का पति शराब पीने व जुआ खेलने का आदी था। वह सविता को मारता-पीटता था। पति का दोस्त गांव में रहने वाला भूपेंद्र घर आया करता था। भूपेंद्र दूर के रिश्ते में सविता का भांजा भी लगता है, लेकिन इनके बीच प्रेम संबंध हो गए। पति उन पर शक भी करने लगा था। सविता अपने पति से परेशान थी। इस कारण उन्होंने सत्येंद्र को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। योजना के तहत दो बार खाने में जहर भी दिया, लेकिन भूपेंद्र को सिर्फ उल्टियां ही हुईं। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से हत्या की घटना को अंजाम दिया गया।
योजना के तहत ग्यारह जनवरी को भूपेंद्र व उसका दोस्त अखिलेश पहले से ही खेत में छुपकर बैठ गए थे। पानी देने के बाद सत्येंद्र जब सो रहा था, तभी तीनों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। पत्नी ने गला दबाया व अन्य दोनों हाथ पैर पकड़े रहे। इस मौके पर एएसपी (अंडर ट्रेनिंग आईपीएस) चारु निगम उपस्थित थीं।
बच्चों से छूटा मां-बाप का साथ
सत्येंद्र की शादी बारह साल पहले पारीछा क्षेत्र के ग्राम रिछौरा निवासी सविता से हुई थी। उनके दो बच्चे देव (10) व प्रियांशी (05) हैं। सत्येंद्र मजदूरी व चार बीघा जमीन पर खेती करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था। पत्नी द्वारा उठाए गए इस कदम से उनके दोनों बच्चे अनाथ से हो गए हैं।