झांसी। दवा कारोबारी अनिल दरगड़ के घर पड़ी डकैती के मामले में पुलिस के हाथ महत्वपूर्ण क्लू हाथ लग गए हैं। डकैतों की तलाश में जुटी पुलिस टीमों ने मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में जाल फैलना शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्र बताते हैं कि तीन लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है।
सिविल लाइन निवासी दवा कारोबारी अनिल दरगड़ के घर पर रविवार-सोमवार की रात आधा दर्जन सशस्त्र डकैतों ने डाका डाला था। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने जब पीड़ित परिवार से बातचीत की तो पता चला कि चार-पांच बदमाशों की भाषा झांसी की नहीं थी। वह हिंदी भी नहीं बोल पा रहे थे। वारदात के समय बदमाशों को लीड करने वाले दो डकैत शुद्ध हिंदी बोल रहे थे। सभी की उम्र 20-30 वर्ष रही होगी। पर्सनलिटी भी स्लिम थी।
पुलिस ने वारदात के तरीके की गहनता से स्टडी की, जिससे स्पष्ट हुआ कि चार बदमाश पारदी जनजाति के रहे होंगे। सरगना स्थानीय हो सकते हैं। इसके बाद पुलिस की कई टीमें डकैतों की तलाश में लगा दी गई। शाम होने तक पुलिस के हाथ कई क्लू हाथ लग गए। कई स्थानों पर पुलिस ने दबिश भी दी, जहां से तीन संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस को पता लगा है कि कुछ बदमाश मध्यप्रदेश के जिलों की तरफ भागे हैं।
पुलिस ने वहां से अधिकारियों से संपर्क साधा है। स्थानीय पुलिस को सहयोग मिलने पर पुलिस को कुछ सफलता हाथ लगी। डीआईजी शरद सचान मंगलवार को दवा कारोबारी के घर गए और घटना की जानकारी ली। भरोसा दिलाया कि शीघ्र ही डकैत पकड़े जाएंगे।
सीसीटीवी के फुटेज में दिखे डकैत
स्वॉट टीम प्रभारी विक्रम सिंह ने मंगलवार को घटनास्थल का मुआयना किया। एक स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगे मिल गए। जब उनकी टीम ने फुटेजों को खंगाला तो डकैत नजर आ गए। हुलिया के आधार पर स्वॉट टीम ने डकैतों की तलाश शुरू कर दी है। टीम ने टावर को डंप करके कई संदिग्ध मोबाइल नंबरों को खंगालना शुरू कर दिया है।
सिविल लाइंस मोहल्ले का दर्द
सिविल लाइंस निवासी दवा कारोबारी अनिल दरगड़ के घर पड़ी डकैती के बाद मोहल्ले के लोग दहशत में हैं। उनका कहना है कि पुलिस को वारदात के बाद ही दिखती है। कभी मोहल्ले में गश्त को नहीं आती। तय किया है कि अब वे निजी सुरक्षा गार्ड सीसीटीवी कैमरे भी लगवाएंगे। यानी अपनी सुरक्षा अपने हाथ।
बंदूक की बरामदगी आज तक नहीं
पुलिस कागजों में गश्त करती है हकीकत में नहीं। दो दशक से रह रहा हूं, मगर आज तक कालोनी में पुलिस नहीं देखी है। नवंबर 1997 में मेरे घर में चोरी हुई थी। बदमाश 12 बोर की बंदूक और 10 हजार रुपये चुराकर ले गए थे, जो आज तक पुलिस बरामद नहीं कर सकी है। अगर पुलिस की ऐसी ही कार्यप्रणाली रहेगी तो बदमाश वारदात करते ही रहेंगे।
डा. आरपी सिंह
कोई घटना होने पर दिखती है पुलिस
जब कोई घटना हो जाती है, तो पुलिस कालोनी में आ जाती है। इसके बाद पुलिस सालों तक नजर नहीं आती है। पुलिस कैसे क्षेत्र में गश्त करती है, जो आज तक दिखाई नहीं दी है। अनिल दरगड़ के घर हुई डकैती की वारदात ने कालोनी के लोगों में अजीब दहशत पैदा कर दी है। अधिकारियों को चाहिए कि वे पुलिस गश्त के इंतजाम करें और इसे चेक भी करें।
डा. यूके जैन
डकैती ने हिलाकर रख दिया है
डकैती की वारदात ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। इतने सुरक्षित मकान में जब बदमाश वारदात को अंजाम दे सकते हैं, तो फिर कहां नहीं दे सकते? कालोनी के लोगों को पहले की तरह से प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड की व्यवस्था करनी होगी ताकि सुरक्षा व्यवस्था हो सके। सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए जाए।
रेखा गृहणी
पहले जैसी व्यवस्था बहाल की जाएगी
छह-सात वर्ष पहले कालोनी में प्राइवेट सुरक्षा कर्मी लगा हुआ था, तब लोग काफी सुरक्षित महसूस करते थे। पहली जैसी व्यवस्था को बहाल करने के लिए फिर से बातचीत की जाएगी। जब डकैती वारदात को अंजाम देकर घर से कूदकर भाग रहे थे, तो उसने शोर मचाकर पीछा किया। मगर बदमाशों ने फायरिंग कर दी, जिस पर भागना पड़ा था।
प्रवीण चचौदिया
केमिस्ट एसोसिएशन ने दी हड़ताल की चेतावनी
दवा कारोबारी के घर पड़ी डकैती के विरोध में डिस्ट्रिक केमिस्ट एसोसिएशन ने मंगलवार एसएसपी को ज्ञापन सौंपा। डकैती का जल्द खुलासा नहीं होने पर बेमियादी हड़ताल की चेतावनी दी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि बदमाशों ने डकैती डालकर पुलिस तंत्र को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि वारदात का जल्द खुलासा नहीं होने पर एसोसिएशन बेमियादी हड़ताल करने को मजबूर होगी। इस दौरान जितेंद्र अग्रवाल, नितिन मोदी मौजूद थे।
चूक गए चौहान
झांसी। रविवार को सिविल लाइन में जिस दवा कारोबारी अनिल दरगड़ के घर में डकैती पड़ी थी, उसके सामने इलाकाई चौकी इंचार्ज गंगाधर चौहान किराये पर रहते हैं। शोरगुल सुनकर वह घर से बाहर निकले लेकिन, डकैतों का पीछा करने के बजाए चुपचाप वहां से खिसक लिए। जांच में हकीकत सामने आने के बाद एसएसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया।
नवाबाद थानांतर्गत चंदा होटल के पीछे सिविल लाइन में दवा कारोबारी अनिल दरगड़ के घर डकैती के बाद मोहल्ला दहशत में था। अनिल ने अपने पड़ोसी परेश चचौदिया को सूचना देकर मदद की गुहार लगाई। इस पर वह अपने परिवार समेत दरवाजे पर पहुंच गए और शोर मचाने लगे। आसपास के लोग बाहर आ गए। जांच में पता लगा है कि घर में सो रहे चौकी इंचार्ज गंगाधर चौहान की भी नींद खुल गई और वह भी बाहर निकल आए। उनके ही सामने बदमाश दीवार फांदकर घर से बाहर निकले। पहले तो गंगाधर चौहान कुछ लोगों के साथ डकैतों की ओर चले लेकिन गोली चलने लगी तो वह घबरा गए। चुपचाप वहां से खिसक लिए और अपने घर आ गए। कुछ देर बाद उन्होंने फोन से थानाध्यक्ष को सूचना दी।
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि चौकी इंचार्ज के पास न तो रिवाल्वर थी और न ही वायरलैस सेट, जबकि दोनों ही उनके पास होने चाहिए थे। रिवाल्वर होती तो वह बदमाशों का पीछा करते और वायरलैस सेट होता तो तुरंत कंट्रोल रूम को बताते। उनकी इस लापरवाही और देरी की वजह से बदमाशों को भागने का मौका मिला। उनका कहना है कि यदि वह खाली हाथ ही बदमाशों का पीछा करते तो निश्चित भीड़ की मदद से किसी न किसी बदमाश को जरूर पकड़ लेते, लेकिन उन्होंने ऐसा करना मुनासिब नहीं समझा। थानाध्यक्ष को भी देर से सूचना दी, तब तक बदमाश भाग चुके थे।