झांसी। ऑनलाइन भुगतान पेट्रोल पंप संचालकों के लिए मुसीबत बन गया है। इसके जरिये साइबर जालसाज आसानी से उनको शिकार बना रहे हैं। झांसी एवं आसपास के 71 पेट्रोल पंप संचालक यूपीआई से हो रही ठगी का शिकार हो चुके हैं, इनमें हाईवे के पेट्रोल पंप की संख्या सर्वाधिक है। जालसाजी के शिकार पंप संचालकों के लाखों रुपये भी फ्रीज हैं। इस रकम से भी उनको हाथ धोना पड़ रहा।
पेट्रोल पंप पर करीब 70 फीसदी ईंधन का भुगतान ऑनलाइन हो रहा है। साइबर जालसाज इसी का फायदा उठा रहे हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि कई तरीके से जालसाज ठगी कर रहे हैं। जालसाजों ने कुछ एप बना रखा है, जिसमें फर्जी यूपीआई एप के क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते हैं। पेट्रोल पंप कर्मचारियों को इससे बनी फर्जी ट्रांजैक्शन रसीद दिखाकर भुगतान का दावा करते हैं जबकि, वास्तव में भुगतान नहीं होता। इसका पता बाद में चलता है। इसी तरह साइबर जालसाज क्रेडिट कार्ड हैक करके उसके सहारे हजारों रुपये का ईंधन भरा लेते हैं। भुगतान का मैसेज जब क्रेडिट कार्ड होल्डर के पास जाता है तब वह भुगतान रोक देता है। यह पैसा पंप संचालक के खाते में फ्रीज हो जाता है। पंप संचालक को तुरंत पता भी नहीं चलता। कई महीने तक इस पैसे का इस्तेमाल न हो पाने के बाद पता लगाने पर फर्जीवाड़ा मालूम चलता है। यह नुकसान पंप संचालक को झेलना पड़ता है। इसी तरह कई जालसाज भुगतान के एवज में नकद पैसा ले जाते हैं। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि पंप संचालकों की ओर से शिकायतें आई हैं। पंप संचालकों की बैठक बुलाकर निदान कराया जाएगा।
साइबर जालसाजों से सभी पेट्रोल पंप संचालक परेशान हैं। तकरीबन हर किसी के साथ ठगी हो चुकी है। इसे देखते हुए पेट्रोल पंप संचालकों ने बड़े भुगतान यूपीआई के माध्यम से स्वीकार करना बंद कर दिया है। अब सिर्फ बैंक के माध्यम से ही भुगतान लिए जा रहे हैं। पेट्रोल पंप संचालकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए पुलिस को भी कार्रवाई करनी चाहिए।
राहुल रिछारिया
पूर्व उपाध्यक्ष, बुंदेलखंड पेट्रोलियम एसोसिएशन
निवाड़ी के युवकों का गिरोह सक्रिय
कुछ पंप संचालकों ने फर्जीवाड़ा होने पर जब पुरानी सीसीटीवी फुटेज एवं ट्रांजैक्शन के माध्यम से पड़ताल की तब इसमें निवाड़ी के युवकों की भूमिका उजागर हुई। पंप संचालक राहुल रिछारिया का कहना है कि निवाड़ी के एक परिवार के ही कई भाई इस तरह से पेट्रोल पंप पर जाकर फर्जीवाड़ा करते हैं।