बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की बायोमेडिकल साइंस प्रथम वर्ष की छात्रा ने ओबीसी गर्ल्स हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उसने अच्छे से पढ़ाई नहीं कर पाने को आत्महत्या करने की वजह बताया है। एक दिन पहले ही वह घर से लौटकर हॉस्टल आई थी।
कानपुर देहात के सुजौर, रनिया के सुरजीत सचान की पुत्री स्मृति सचान ने वर्ष 2017 में बीयू के बायोमेडिकल साइंस कोर्स में प्रवेश लिया था। 17 मई से सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू होनी हैं। सोमवार को ही वह घर से लौटकर आई थी। रात को खाना खाने के बाद वह हॉस्टल के कमरा नंबर एफ-7 में सो गई। सुबह उसकी दोस्त ने उसके मोबाइल पर फोन किया, लेकिन उठा नहीं। दोबारा कॉल लगाने पर भी पूरी घंटी जाने के बाद फोन कट गया।
इसके बाद उसने स्मृति के पास रहने वाली छात्रा को फोन मिलाया और पूछताछ की। तब छात्रा ने स्मृति के कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। छात्रा की सूचना पर वॉर्डन व बीयू के अन्य अधिकारी भी मौके पर जा पहुंचे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो कमरे में स्मृति का शव खिड़की पर दुपट्टा से फांसी पर लटका दिखा। स्मृति के परिजनों को फोन कर घटना की सूचना दी गई। परिजनों ने झांसी में रहने वाले रिश्तेदारों को मौके पर भेजा, तब जाकर उसके शव को फंदे से उतारा जा सका। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
एक हफ्ते छुट्टी पर रही
बायोमेडिकल साइंस विभाग के समन्वयक डॉ. लवकुश द्विवेदी ने बताया कि स्मृति 23 से 29 अप्रैल तक छुट्टी पर घर गई थी। जब वह छुट्टी मांगने आई, तब कह रही थी कि मम्मी की याद आ रही है, इसलिए घर जाना चाहती है। इस पर उसे छुट्टी की अनुमति दे दी थी।
सॉरी मम्मी-पापा ...
सुसाइड नोट में स्मृति ने लिखा है- सॉरी मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। मैं हमेशा मस्ती करती रही। पढ़ाई नहीं की। कभी बात नहीं मानी। मैं बिल्कुल भी अच्छी नहीं हूं। कभी भी मेरा कोई दोस्त नहीं बना। सभी मुझे नजरअंदाज करते रहे। मुझे पता है मैं बहुत गलत कर रहीं हूं, पर मेरे बाद कीर्ति, जाग्रति (दोनों बहनें) को अच्छे से पढ़ाना। मैं अपनी मर्जी से जान दे रही हूं, क्योंकि एक अच्छी पोजीशन से लो पोजीशन पर आ गई हूं। जो मुझे बहुत परेशान करता है। बाय, प्लीज सॉरी।
तनाव में उठाते कदम
अक्सर विद्यार्थी अपनी सोच के अनुरूप प्रदर्शन न कर पाने और भविष्य को लेकर नाउम्मीद हो जाने की वजह से तनाव में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। परिजन, दोस्त भी उनके तनाव में होने का पता नहीं कर पाते। डिप्रेशन में आने वाले छात्र-छात्राओं को खुलकर अपनी समस्याओं को परिजनों, मित्रों से साझा करना चाहिए। ऐसा न सोचें कि अपनी तकलीफ बताने से मां-बाप, रिश्तेदार या दोस्त परेशान होंगे। वहीं, परिजनों को भी लगातार बच्चे से बातचीत करते रहना चाहिए। आजकल की व्यस्त जीवन में इसकी कमी आती जा रही है।
- डॉ. अमन किशोर, मनोचिकित्सक
ऐसे करें डिप्रेशन की पहचान
डिप्रेशन एक बीमारी है, जिसको समय रहते ठीक नहीं किया गया तो गंभीर परिणाम सामने आते हैं। यदि कोई व्यक्ति भविष्य को लेकर हताश रहता हो, नींद नहीं आती हो, थकान रहती हो, उसका मन उदास रहता हो तो वह डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। ऐसे में तुरंत व्यक्ति को मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।