झांसी। चेक में हजारों को लाखों में बदलकर डाकघर को चालीस लाख रुपये की चोट पहुंचाई गई है। लेकिन, इसकी भनक पुलिस को नहीं है। डाक विभाग या बैंक की ओर से अब तक पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी गई है। यह जिम्मेदारी एकदूसरे पर डाली जा रही है।
चेक में हुई ओवर राइटिंग की सूचना 17 अक्तूबर को एसबीआई के क्लियरिंग हाउस से डाक विभाग को मिली थी। यह जानकारी रानी लक्ष्मीबाई अरबन कोआपरेटिव बैंक को भी दी गई थी। लेकिन, मामला पूरा खुल जाने के बाद भी अब तक दोनों में से किसी ने भी इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी है।
इस मामले में प्रवर डाक अधीक्षक वी के सिंह का कहना है कि भले ही रकम डाक विभाग की गई है, परंतु फ्राड बैंक स्तर पर हुआ है। इसलिए एफआईआर बैंक को करानी चाहिए। इसके लिए बैंक से कहा भी गया है। वहीं, रानी लक्ष्मीबाई अरबन कोआपरेटिव बैंक के सचिव सुरेंद्र तिवारी का कहना है कि रकम डाक विभाग की गई है। एफआईआर भी डाक विभाग को करनी चाहिए। जांच में बैंक पूरा सहयोग कर रहा है।
यह भी है झोल
- चेक पर अमाउंट भरने से पहले जगह नहीं छोड़ी जाती है, जिससे ओवरराइटिंग की गुंजाइश ही न रहे, परंतु डाक विभाग की चेक में पर्याप्त जगह रही, जिससे आसानी से ओवरराइटिंग हो गई।
- खाते से रकम निकलती रही और डाक विभाग में अभिलेखों का मिलान भी नहीं किया गया। क्लियरिंग हाउस में चेक नहीं पकड़ी जाती, तो घपला लाखों की जगह करोड़ों में भी पहुंच सकता था।
- बैंक व क्लियरिंग हाउस का ओवरराइटिंग पर गच्चा खा जाना चौंकाने वाला है, वरना मामूली सी भी ओवरराइटिंग पर चेक लौटा दी जाती है।