झांसी। भारतीय तिब्बत सीमा सुरक्षा बल (आईटीबीपी) के आईजी नवीन अरोरा का कहना है कि सीएपी (सिविक्स एक्शन प्रोग्राम) का नक्सल प्रभावित इलाकों में काफी अच्छा प्रभाव पड़ा है। तमाम नक्सली हथियारों को छोड़ जीवन की मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं। जब तक केंद्र व राज्य सरकारों की नीतियों के बीच समन्वय नहीं होगा तब तक नक्सली नासूर बने रहेंगे।
लखनऊ से झांसी आए नवीन अरोरा ने बताया कि वह उड़ीसा के नक्सल प्रभावित राज नंदगांव व नारायणपुर में काम कर चुके हैं, जहां बारूदी सुरंगों के विस्फोटों को रोकने के लिए प्रभावी काम किया गया है। इन गांव में आईटीबीपी ने सीएपी के तहत कई योजनाएं चलाईं। शैक्षणिक कार्यक्रम चले, लोगों को जीवन की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयास किए गए जिसके परिणाम रहा है कि तमाम लोग हथियार छोड़ चुके हैं। छत्तीसगढ़ के भी नक्सली इलाकों में सीएपी काफी सफल रहा है।
जब तक केंद्र और राज्य सरकार समन्वय से एक रणनीति बनाकर कार्य नहीं करेंगे तब तक नक्सल नासूर की तरह से फैलता रहेगा। यही वजह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद नक्सलियों का दायरा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वह झांसी में तैनात थे, तभी नक्सलियों को कारतूस सप्लाई करने का मामला सामने आया था।