झांसी। कोरोना काल में मास्क, पीपीई किट, उपकरणों की खरीद का मामला एक बार फिर तूल पकड़ गया है। सपा विधायक की मांग पर सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं। पूरे मामले में चिकित्सा संस्थानों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से विवरण तलब किया है। कमियां सामने आने पर बड़ी कार्रवाई संभव है।
कानपुर की आर्यनगर विधानसभा से विधानसभा सदस्य अमिताभ बाजपेई ने 21 अगस्त को नियम 51 के तहत सदन में कोविड से संबंधित सामग्री खरीद मामले में जानकारी मांगी थी। आरोप था कि पीपीई किट, एन-95 मास्क, सर्जिकल मास्क सहित अन्य सामग्री की खरीद में गड़बड़ी हुई है। टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर सामग्री की गुणवत्ता भी खराब होने की शिकायतें मिलीं। वहीं, कोविड किट में घोटाले का आरोप लगाते हुए आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी पहले मामला उठा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि कोरोना महामारी में घोटाला करना कफन में दलाली खाने जैसा है। ऐसे में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनु सचिव ने महानिदेशक और प्रशिक्षण को पत्र लिखा है। इसके बाद पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज में हुई कोरोना किट खरीद के मामले में चिकित्सा संस्थानों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से विवरण तलब किया है। ऐसे में जल्द ही बड़ी कार्रवाई संभव है।
प्रदेश में सबसे महंगी किट झांसी में खरीदी गई
कोरोना का लेकर झांसी पहले से ही विवादों में रहा है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि झांसी में पंचायती राज विभाग ने प्रदेश में सबसे महंगी कोरोना किट खरीदी। इसमें पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, मास्क, सैनिटाइजर शामिल हैं। बताया गया कि 470 ग्राम पंचायतों में लगभग 70 लाख रुपये की कोरोना किट खरीद गई।
कोरोना काल में खरीद के दौरान जमकर मनमानी हुई है। अफसरों ने आपदा को कमाई के अवसर में बदल दिया है। इस मामले की जांच की मांग अगस्त में की थी। मुझे उम्मीद नहीं थी कि सरकार जांच कराएगी। अब निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। - अमिताभ बाजपेई, सपा विधायक।