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कोविड घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश नाकाम

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झांसी। कोविड घोटाले पर पर्दा डालने की भरपूर कोशिश की गई। कुछ ब्लॉकों के एडीओ पंचायतों ने उपकरण खरीद से संबंधित कॉलम खाली छोड़कर अपनी रिपोर्ट भेज दी। वहीं, रिपोर्ट में यह लिखा कि विकासखंड में किसी भी पंचायत द्वारा उक्त सामग्री क्रय का भुगतान नहीं किया गया। यह मामला जब एक अधिकारी के संज्ञान में आया तो उन्होंने सही रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। बाद में यह रिपोर्ट बदली गई।
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कोरोना वायरस से बचाव के लिए खरीदे गए उपकरणों में घपला हुआ। कीमत से काफी ऊंचे दामों पर खरीद के आरोप लगने के बाद अब शासन ने एसआईटी जांच का फैसला लिया है। इससे हड़कंप की स्थिति है। वहीं, मामला तूल पकड़ने के बाद इस घोटाले पर पर्दा डालने की भी जीतोड़ कोशिश की गई। सूत्रों ने बताया कि कुछ ब्लॉकों के एडीओ पंचायतों ने शासन की तरफ से मांगी गई सूचना के संबंध में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कुछ भी उल्लेख नहीं किया। रिपोर्ट में न तो पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर आपूर्ति करने वाली फर्म के नाम की जानकारी दी गई और न ही दर की। समस्त कॉलम खोली छोड़कर यह लिख दिया कि विकासखंड में किसी भी पंचायत द्वारा उक्त सामग्री क्रय का भुगतान नहीं किया गया है। जबकि, क्रय ही नहीं किया गया तो इसका उल्लेख भी करना चाहिए था। भुगतान नहीं किया गया लिखकर मामले को गोलमोल करने की कोशिश की गई।
अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया मुद्दा, एसआईटी जांच शुरू
कोविड घोटाले का मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया है। लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद घोटाले की गूंज शासन स्तर तक भी पहुंची। इसके बाद एसआईटी जांच के आदेश हो गए हैं। एसआईटी के हाथों में जांच आते ही कइयों के पसीने छूटने लगे हैं।
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दान दिखाने पर चलता रहा मंथन
सूत्रों ने बताया कि उपकरण खरीद प्रकरण में शुक्रवार को विकास भवन में एक अधिकारी ने अपने अधीनस्थों के साथ बैठक की। बैठक में उपकरणों को दान में खरीद दिखाने की भी चर्चा हुई। हालांकि, बाद में तय हुआ कि किसी भी दस्तावेज आदि से छेड़छाड़ या बदलाव नहीं किया जाए।
ये है पूरा मामला
कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए 23 जून को अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने शासनादेश के जरिए हर ग्राम पंचायतों को चिकित्सीय उपकरणों की खरीद के निर्देश दिए थे। किट में एक पल्स ऑक्सीमीटर, एक इंफ्रारेड थर्मामीटर, 500 पीस थ्री लेयर मास्क, सौ सर्जिकल ग्लव्स, पांच लीटर सैनिटाइजर समेत फेस शील्ड शामिल थी। आपदा की इस घड़ी में कुछ लोगों ने कमाई का अवसर ढूंढ लिया। बताया गया कि दो हजार रुपये में मिलने वाले ब्रांडेड थर्मल स्कैनर 3500 से 5000 रुपये तक खरीदे गए, वो भी चाइनीज। इसी तरह, कीमत से ढाई गुना दामों पर ऑक्सीमीटर की खरीद हुई। एक थ्री लेयर मास्क लगभग 720 रुपये में खरीदे गए। ग्लव्स और फेस शील्ड की भी बाजार से ऊंचे दामों पर खरीद की गई। इसी तरह, एक किट 15 हजार रुपये से अधिक कीमत में खरीदी गई। जबकि, इसकी कीमत सात हजार से अधिक नहीं बताई जा रही है। खरीद के बाद बिल भी प्रधान और सचिवों के नाम से ही बनवाए गए। कई प्रधान तो राजी हो गए लेकिन कुछ ने धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध कर दिया। कई सचिव भी इस तरह की खरीद से संतुष्ट नहीं हैं।
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