जिले में 800 का ऑक्सीमीटर चार हजार और 1800 का थर्मामीटर 4500 रुपये में खरीदने के मामले की जांच ने तेजी पकड़ ली है। पंचायती राज विभाग की तरफ से खरीद से संबंधित सभी बिल, वाउचर इकट्ठे किए जा रहे हैं। शासन स्तर से भी इसकी निगरानी शुरू हो गई है। इससे हड़कंप की स्थिति है। कइयों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए 23 जून को अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने शासनादेश के जरिए हर ग्राम पंचायतों को चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद के निर्देश दिए थे। किट में एक पल्स ऑक्सीमीटर, एक इंफ्रारेड थर्मामीटर, 500 पीस थ्री लेयर मास्क, सौ सर्जिकल ग्लव्स, पांच लीटर सैनिटाइजर समेत फेस शील्ड शामिल थी। बताया गया कि जिले में एक थर्मल स्कैनर 3500-5000 रुपये तक खरीदे गए, जबकि ब्रांडेड थर्मल स्कैनर अधिकतम दो हजार रुपये में बाजार में मौजूद हैं। खास बात ये है कि खरीदे गए थर्मल स्कैनर चाइनीज हैं।
इसी तरह, ऑक्सीमीटर बाजार की कीमत से ढाई गुना अधिक दाम पर खरीदे गए। यह भी ब्रांडेड नहीं है। एक थ्री प्लाई मास्क लगभग 720 रुपये में खरीदे गए। ग्लव्स और फेस शील्ड की भी बाजार से ऊंचे दामों पर खरीद की गई। इसी तरह, एक किट 15 हजार रुपये से अधिक कीमत में खरीदी गई। जबकि, इसकी कीमत सात हजार से अधिक नहीं बताई जा रही है। खरीद के बाद बिल भी प्रधान और सचिवों के नाम से ही बनवाए गए। कई प्रधान तो राजी हो गए लेकिन कुछ ने धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध कर दिया। कई सचिव भी इस तरह की खरीद से संतुष्ट नहीं हैं।
वहीं, लखनऊ में पत्रकार वार्ता कर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी झांसी में कोविड की आड़ में बड़ा घोटाला होने का आरोप जड़ दिया। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि इस सबसे बड़े संकट के दौर में घोटाला करना श्मशान में दलाली खाने जैसा है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में एसआईटी बनाकर कराने की मांग की। मामला तूल पकड़ते देख जांच ने भी गति पकड़ ली है। पंचायती राज विभाग ने सभी बिल, वाउचर इकट्ठा करने शुरू कर दिए हैं।
यह जांच की जा रही है कि जो उपकरण खरीदे गए हैं, उनकी वास्तविक मूल्य क्या हैं। उपकरण स्वदेशी हैं अथवा चाइनीज। खरीद के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई है। वहीं, इस मामले की शासन स्तर से भी निगरानी शुरू कर दी गई है। इस मामले में कार्रवाई तय मानी जा रही है। इससे हड़कंप की स्थिति है।