अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिला अदालत में लंबित तमाम मामले ऐसे हैं, जिनमें कई साल बीत जाने के बाद भी पुलिस न मुल्जिम का पता लगा सकी, न कोई गवाह कोर्ट में हाजिर कर सकी। ऐसे मामलों में अदालतें तारीख पर तारीख देकर थक गईं। मजबूरन अदालतों को स्थायी वारंट जारी करना पड़ रहा है। तकरीबन हर थाने में ऐसे स्थाई वारंट लंबित हैं। हर माह इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है।
लंबित आपराधिक मामलों को जल्द निपटाने को लेकर न्यायालयों पर दबाव है लेकिन, दर्जनों मामले ऐसे लंबित हैं, जिनमें 20-25 साल बीत जाने के बाद भी पुलिस न मुल्जिम पेश कर सकी न गवाह। तारीख आने पर कोर्ट के सामने सिर्फ पत्रावलियां पेश होती हैं। मजबूरन कोर्ट को आगे की तारीख देनी पड़ जाती है। ऐसे मामलों में अब कोर्ट से स्थाई वारंट जारी हो रहे हैं।
अधिवक्ताओं का कहना है कई मामलों में आरोपियों के पते सही नहीं मिलते। इस वजह से उनकी तलाश नहीं हो पाती। अब कोर्ट के सामने पत्रावलियां तभी पेश होंगी जब आरोपी कोर्ट के सम्मुख हाजिर होंगे।
केस एक
सरकार बनाम वीर सिंह
प्रेमनगर कोतवाली में अभियुक्त वीर सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 326 समेत अन्य धाराओं में वर्ष 2016 में मुकदमा दर्ज हुआ। दस साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। मामले में कई तारीख लीं, जमानती और गैर जमानती वारंट जारी हुए लेकिन, मुल्जिम फरार रहा। पुलिस जब उसे तलाशते हुए उसके दिए पते पर पहुंची तब वहां इस नाम का व्यक्ति नहीं मिला। विवेचक ने यह बात कोर्ट को बताई। कोर्ट ने गवाह और सुबूत पेश करने को कहा लेकिन, पुलिस इसे पेश नहीं कर सकी। इस वजह से कोर्ट ने मई में उसके खिलाफ स्थाई गैर जमानती पत्र जारी कर दिया।
केस दो
सरकार बनाम समीर
सीपरी बाजार में आरोपी समीर के खिलाफ गैंगस्टर के तहत पुलिस ने कार्रवाई की। उसके खिलाफ वर्ष 2005 में गैंगस्टर एक्ट समेत आईपीसी की 457, 380 सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई। कई तारीखें ली गईं। कोर्ट ने गैर जमानती वारंट भी जारी किए। जब पुलिस पहुंची तब मालूम चला कि आरोपी 15 साल पहले अपना घर बेच कर जा चुका है। उसके नए ठिकाने के बारे में मालूम नहीं चला। पुलिस ने कोर्ट में बताया कि आरोपी के अब भविष्य में मिलने की संभावना नहीं है। ऐसे स्थिति में कोर्ट ने स्थाई गैर जमानती वारंट जारी करते हुए पत्रावलियों को दाखिल दफ्तर करने का आदेश दे दिया।
केस तीन
सरकार बनाम कृष्णकांत उर्फ केके
सदर बाजार थाने में आरोपी कृष्णकांत के खिलाफ आयुध अधिनियम के तहत वर्ष 2011 में रिपोर्ट दर्ज की गई। कृष्णकांत पर साथियों के साथ मिलकर पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला का आरोप है। कृष्णकांत 16 जनवरी 2015 को अधिवक्ता के साथ कोर्ट के सामने हाजिर हुआ। इसके बाद दर्जनों तारीखें लगीं लेकिन, वह कभी पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने गैर जमानती वारंट भी जारी कर दिया। इसके बाद भी पुलिस उसे कोर्ट के सामने हाजिर नहीं कर सकी। कोर्ट के आदेश पर उसकी संपत्ति कुर्क कर ली गई। पुलिस ने जब स्थाई पते पर तलाशा तब वह वहां भी नहीं मिला। कोर्ट ने स्थाई वारंट जारी करके पत्रावलियां दाखिल दफ्तर कर दी।