झांसी। जिले में नकली दवाओं का कारोबार खूब हो रहा है। लोगों को खूब अधोमानक दवाएं बेची जा रही हैं। मेडिकल स्टोर संचालक भी मुनाफाखोरी के चलते लोगों को सैंपल दवाएं तक बेच दे रहे हैं। मगर औषधि प्रशासन विभाग जांच के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहा है। आलम यह है कि जिले में करीब 1500 मेडिकल स्टोर हैं, लेकिन अब तक महज 77 दवाओं के ही नमूने लिए जा सके हैं। इसमें भी करीब 30 नमूनों की रिपोर्ट आज तक मिली ही नहीं है। कार्रवाई का डर नहीं होने से मेडिक ल स्टोर संचालक और दवा कंपनियां मनमानी पर उतारू हैं।
कोरोना काल में झांसी में नकली दवाएं खूब बेची गईं। हालात यह हो गए कि कोरोना की दूसरी लहर में नकली रेमडेसिविर तक बाजार में खूब बिका। इसके साथ ही नकली सैनिटाइजर, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन तक खूब बेचे गए। अभी भी यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। बाजार में तमाम नकली दवाएं बेची जा रही हैं। डॉक्टरों से कमीशन तय करके लोगों को महंगी दवाएं लिखी जा रही हैं। तमाम दवाएं तो ऐसी हैं, जिनके सैंपल फेल हो चुके हैं, लेकिन वह भी बाजार में धड़ल्ले से बिक रही हैं।
मगर विभाग सैंपल लेने और दुकानों की जांच के नाम पर सुस्ती बरत रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष की बात करें तो अप्रैल से अब तक जिले में करीब 77 दवाओं के सैंपल लिए गए हैं। जिसमें से 47 नमूनों की रिपोर्ट मिली है। जबकि 30 नमूनों की रिपोर्ट आज तक लखनऊ प्रयोगशाला में लंबित है। कार्रवाई सुस्त होने से मेडिकल स्टोर संचालक जमकर चांदी काट रहे हैं।
महज एक नमूना हुआ फेल
इस साल लिए गए नमूनों में से एक नमूना फेल हुआ है। औषधि निरीक्षक के मुताबिक अप्रैल में उल्दन के एक मेडिकल स्टोर से एजिथ्रोमाइसिन टेबलेट का नमूना लिया गया था। पिछले दिनों इसकी रिपोर्ट मिली तो नमूना अधोमानक पाया गया। टेबलेट के पत्ते पर लिखे गए सॉल्ट निर्धारित मात्रा में नहीं पाए गए। विभाग ने मेडिकल स्टोर संचालक और कंपनी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
जिले में लगातार मेडिकल स्टोर से नमूने लिए जाते हैं। इस साल 77 नमूने लिए जा चुके हैं। जबकि पिछले साल नकली सैनिटाइजर और दवाओं के अधोमानक पाए जाने पर कंपनियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
उमेश भारती, औषधि निरीक्षक