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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए मंगल दल

Fri, 23 Oct 2015 12:39 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। प्रांतीय रक्षक दल और युवा कल्याण विभाग के मंगल दल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं। प्रधान व सचिवों की मिलीभगत के कारण मंगल दल के लिए आने वाला पैसा दल के सदस्यों तक नहीं पहुंच सका, इस कारण वह निष्क्रिय हो गए। पिछले तीन साल से शासन ने मंगल दल के मद में पैसा अवमुक्त करना ही बंद कर दिया है।
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युवाओं को जन हितैषी कार्यों से जोड़ने के लिए युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रत्येक ग्राम सभा में मंगल दल का गठन किया गया था। दल के सदस्य लोगों को अल्प बचत और नसबंदी जैसे सरकारी कार्यक्रमों के लिए जागरूक करते थे और विभाग को मिलने वाले पौधरोपण के लक्ष्य को पूरा करते थे। पूर्व में शासन द्वारा इन दलों को फर्श, लालटेन, गैस बत्ती, प्यानो आदि सामान दिया जाता था, जिससे यह लोग गांव की चौपाल पर बैठ कर सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित कर सकें।

करीब डेढ़6 दशक से इस व्यवस्था में बदलाव कर शासन ने प्रत्येक सक्रिय दल को 2000 रुपये प्रति वर्ष देने की व्यवस्था बनाई थी, जिससे यह लोग अपने लिए आवश्यक सामग्री स्वयं खरीद सकें। यह पैसा ग्राम निधि खाता संख्या एक में आता था, जिसका संचालन प्रधान व सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है।
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प्रधान व सचिवों ने मिलीभगत कर मंगल दलों के लिए आने वाले पैसे की बंदरबांट कर ली। पैसा न मिलने के कारण यह दल निष्क्रिय हो गए हैं, जिससे युवा कल्याण विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। हालत यह है कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में आखिरी बार 52 दलों के लिए पैसा आया था, इसके बाद शासन ने मंगल दल के मद में पैसा भेजना बंद कर दिया है।

जिले में दर्जनों मंगल दल कार्यरत थे। प्रधान व सचिवों द्वारा प्रोत्साहन राशि उन तक नहीं पहुंचाई गई, इस कारण यह दल निष्क्रिय हो गए हैं। मंगल दलों के निष्क्रिय होने के कारण यह योजना बंद सी हो गई है।
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धर्मेंद्र कुमार, जिला युवा कल्याण अधिकारी एवं कमांडेंट प्रांतीय रक्षक दल, झांसी।
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