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कोरोना ने कर दिया अनाथ.....मदद के लिए आगे आकर दीजिए साथ

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झांसी। कोरोना संक्रमण ने जिले में तमाम बच्चों को अनाथ कर दिया। संक्रमण ने माता-पिता का साया छीन लिया, तो कहीं मां या पिता पर बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। अधिकतर परिवार ऐसे हैं, जहां मुखिया की कमी से जिंदगी बिखर गई है। प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों के लालन-पालन और मदद के लिए योजना का एलान किया है, लेकिन सरकारी तंत्र कम संख्या में ही ऐसे बच्चों की तलाश कर सका है। अमर उजाला ने ऐसे बच्चों और परिवारों की मदद के लिए अपनत्व अभियान शुरू किया है। हम ऐसे चार परिवारों की जानकारी दे रहे हैं। सरकारी तंत्र और मददगारों से उम्मीद है कि वे इन परिवारों के सहयोग के लिए आगे आएं।
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कोरोना ने माता-पिता को छीना, अकेली रह गई शिनार
शहर के मिशन कंपाउंड निवासी शिनार सिमोन के परिवार को कोरोना ने पूरी तरह से उजाड़ दिया। शिनार की मां सल्विना सिमान पेशे से से टीचर थीं और 11 अप्रैल को उनकी कोरोना के चलते मौत हो गई। इसके बाद चर्च में पास्टर पिता एडविन सिमोन की 21 अप्रैल को मौत हो गई। ग्वालियर से नर्सिंग कर रही शिनार बिल्कुल अकेली रह गई हैं। फिलहाल वे अपनी एक दोस्त के घर पर रह रही हैं। अकेले पूरी जिम्मेदारी उठाने में सक्षम नहीं हैं। आय का कोई स्रोत न होने से पढ़ाई भी छूटने की नौबत आ गई है।
समझ नहीं आता, कैसे बेटे को पढ़ाऊंगी
ईसाईटोला निवासी सम्राट लिंकन नाहर की एक मार्च 2020 को मौत हो गई। उनकी पत्नी नीलोफर नाहर और 11 साल के बेटे मिजान नाहर की दुनिया खत्म हो गई। हिम्मत रखकर नीलोफर ने जैसे-तैसे बेटे के लिए खुद को संभाला। उनका बेटा मिजान शहर के सेंट मॉर्क्स स्कूल में कक्षा सातवीं में पढ़ता है। शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहा है। नीलोफर का कहना है कि परिवार में कोई और नहीं है। बेटे को पढ़ाने का सपना देखा है। जितना भी पैसा था, सब पति की बीमारी के इलाज में लग गया। अब समझ नहीं आता कैसे खर्च और बेटे की जिम्मेदारी उठाऊं।
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पहले पिता ने छोड़ा, अब मां भी नहीं रही
मसीहागंज के बौद्ध नगर के तीन बच्चों नैन्सी (18), महक (13) और सिद्धार्थ (7) का इस दुनिया में कोई नहीं है। पिता कई साल पहले मां और तीनों बच्चों को छोड़कर चले गए। अब मां सीमा की आठ अप्रैल को कोरोना से मौत हो गई। मां नंदनपुरा में एक फैक्ट्री में छोटा-मोटा काम करके जैसे-तैसे घर चलाती थीं। लेकिन अब वह सहारा भी छिन गया। नैन्सी के मुताबिक मां की तबियत बिगड़ने पर इलाज भी कराया, लेकिन उनको बचा नहीं सके। अब कैसे घर चलेगा?
छिन गई खुशी की सारी खुशियां
बबीना निवासी खुशी रायकवार ने मां को तो बचपन से नहीं देखा। पिछले साल पिता की भी मौत हो गई। कक्षा छह की छात्रा खुशी अपने दादा-दादी के साथ रहती हैं, लेकिन परिवार की माली हालत ठीक नहीं है। दादा-दादी को भी खुशी की चिंता रहती है। खुशी के एक रिश्तेदार ने बताया कि बेटी के भविष्य को लेकर संकट है।
जिंदगी उजड़ गई, उस पर सास और बच्चों की जिम्मेदारी
शहर के इलाइट चौराहा निवासी रुचि अग्रवाल के परिवार को कोरोना ने खत्म कर दिया। दो साल पहले उनके जेठ व्योम अग्रवाल और जिठानी नीलम अग्रवाल की मौत हो गई, तो उनकी बेटी गिनी को जैसे-तैसे संभाला। कोरोना के चलते रुचि के पति मोहित की भी मौत हो गई। अब परिवार में रुचि, उनकी सास राजश्री अग्रवाल, भतीजी गिनी और उनकी सात साल की बेटी मन्सा रह गई हैं। रुचि के मुताबिक परिवार को चलाने में दिक्कत है। घर की जिम्मेदारी कैसे उठाऊं गी बिल्कुल समझ नहीं आता।
हमें दीजिए जानकारी
झांसी। कोरोना संक्रमण ने जिले में कई बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने ऐसे बच्चों की पहचान का अभियान शुरू किया है। हम सरकार, जिला प्रशासन और जरुरतमंद बच्चों के बीच सेतु बनकर उन्हें मदद दिलवाने का प्रयास करेंगे। आपको अपने आसपास ऐसे बच्चों के बारे में कोई जानकारी हो तो कृपया हमें 7617566165 पर व्हाट्सएप के जरिए बताएं अथवा jhs-cityreporter@jhs.amarujala.com पर ई-मेल करें। अगर आपके पास बच्चों का कोई फोटो हो तो उसे भी भेजें।
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