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मेडिकल कॉलेज में कोरोना मरीजों को दी जाने लगी ‘संजीवनी’

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झांसी। कोरोना वायरस के इलाज में संजीवनी साबित हो रहीं रेमडेसिवीर, टेसिलिजुमैब और फेवीपिरवीर दवा महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को भी दी जाने लगी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह दवा कोरोना के उपचार के दौरान काफी असरदार साबित हो रही हैं। इससे मरीजों की रिकवरी तेजी से हो रही है। हालांकि ये इंजेक्शन ढाई हजार से 35 हजार तक के हैं। इन्हें मरीजों को खुद अपने खर्च पर खरीदना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय आपातकालीन स्थिति में रेमडेसिवीर के इस्तेमाल को मंजूरी दे चुका है। दवा का उपयोग कोरोना के शुरुआती इलाज में हो रहा है। दो सप्ताह पहले सरकार की तरफ से नई गाइडलाइन जारी की गई है, जिसमें दवा की डोज छह दिन के बजाए पांच दिन तक मरीजों को देने के लिए कहा गया है। यह दवा कुछ गंभीर रोगों से ग्रस्त मरीजों को नहीं दी जाएगी। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं व 12 साल से कम उम्र के बच्चों को भी यह दवा नहीं दी जानी है। इसके अलावा टेसिलिजुमैब नाम की दवा के उपयोग को भी मंजूरी दी जा चुकी है, जो इम्यून सिस्टम में बदलाव करती है। यह दवा भी मॉडरेट स्टेज वाले मरीजों के इलाज में उपयोग हो रही है। कोरोना मरीजों को शुरुआती दौर में हाइडॉक्सीक्लोरोक्विन दी जा रही है लेकिन यह गंभीर मरीजों के लिए नहीं है।
वहीं, फेवीपिरवीर एक एंटी वायरल दवा है, जिसका उपयोग जापान और चीन में इंफ्लूएंजा के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा का कई वायरस संक्रमणों के इलाज के लिए शोध किया जा रहा है। एक शोध में पाया गया कि यह दवा वायरल को तेजी से कम करने में मददगार है। ऐसे में भारत में इस दवा का क्लीनिकल परीक्षण शुरू हो चुका है। अब यह तीनों ही दवा झांसी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोरोना के मरीजों को उनके लक्षण के अनुसार दी जानी लगी है। हालांकि, मरीजों को दवा खुद खरीदनी पड़ती है। डॉक्टर मरीजों की जरूरत के मद्देनजर दवाएं लिखते हैं।
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किस दवा का कितना डोज
पहले दिन कोरोना मरीज को रेमडेसिवीर इंजेक्शन की 200 एमजी की डोज दी जाती है। इसके बाद अगले चार दिन तक 100-100 मिलीग्राम डोज का इंजेक्शन लगाया जाता है। यह इंजेक्षन कोविड मरीज की हालत गंभीर न हो, इसलिए लगाया जाता है। एक इंजेक्शन की कीमत ढाई से तीन हजार रुपये है। वहीं, टेसिलिजुमैब इंजेक्शन लगातार दो दिन लगाया जाता है। यह गंभीर मरीज में कोरोना वायरस से उत्पन्न जटिलताओं को खत्म करने का काम करता है। इसकी कीमत 30 से 35 हजार रुपये है। इसके अलावा फेवीपिरवीर दवा भी वायरस को बेअसर करने का प्रयास करती है। यह कोर्स साढ़े तीन हजार रुपये का पड़ता है।
देश में कई स्थानों पर इन दवाओं व इंजेक्शनों के क्लीनिकल ट्रायल के दरम्यान सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसके बाद इन दवाओं को कोरोना मरीजों के उपचार में प्रयोग करने की अनुमति दे दी गई है। झांसी मेडिकल कॉलेज में भी अब कोरोना मरीजों के लिए दवाओं, इंजेक्शनों का प्रयोग शुरू हो गया है।
- आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
मेडिकल कॉलेज में कोविड मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद हालातों को देखते हुए रेमडेसिवीर, टेसिलिजुमैब और फेवीपिरवीर दवाएं या इंजेक्षन दिए जाने लगे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से ही इसके लिए अनुमति दी गई है। इन दवाओं और इंजेक्शन के परिणाम भी काफी सकारात्मक आ रहे हैं। कोविड के इलाज में ये मददगार साबित हो रही हैं।
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- डॉ एनएस सेंगर, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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