झांसी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मंजूरी के बाद झांसी में भी कोरोना मरीजों पर रेमडेसिवीर, टेसिलिजुमैब और फेवीपिरवीर दवा या इंजेक्शन का उपयोग शुरू हो गया है। डॉक्टरों के मुताबिक इन दवाओं के काफी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। खासकर रेमडेसिवीर, टेसिलिजुमैब के उपयोग से कई गंभीर रोगियों की जान बचाई जा सकी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय आपातकालीन स्थिति में रेमडेसिवीर के इस्तेमाल को मंजूरी दे चुका है। दवा का उपयोग कोरोना के शुरूआती इलाज में हो रहा है। दो सप्ताह पहले सरकार की तरफ से नई गाइडलाइन जारी की गई है, जिसमें दवा की डोज छह दिन के बजाए पांच दिन तक मरीजों को देने के लिए कहा गया है। इसके अलावा टेसिलिजुमैब नाम की दवा के उपयोग को भी मंजूरी दी जा चुकी है, जो इम्यून सिस्टम में बदलाव करती है। यह दवा भी मॉडरेट स्टेज वाले मरीजों के इलाज में उपयोग हो रही है। वहीं, फेवीपिरवीर का भी मरीजों को दी जा रही है। यह दवा वायरल को तेजी से कम करने में मददगार है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोरोना के मरीजों को दवा खुद खरीदनी पड़ रही है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि खासकर रेमडेसिवीर और टेसिलिजुमैब इंजेक्शन के काफी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कई गंभीर रोगियों यहां तक एआरडीएस से ग्रसित मरीजों को भी इन इंजेक्शनों के जरिए ठीक किया गया। इसमें यह कहना भी गलत नहीं होगा कि कई मरीजों को दूसरा जीवन मिला।
बड़ाबाजार निवासी एक कोरोना पॉजिटिव मरीज की हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती किया गया था। उनकी सेहत लगातार खराब होती जा रही थी, इसके बाद डॉक्टर ने परिजनों से बात कर रेमडेसिवीर इंजेक्शन मंगवा। इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी सेहत में सुधार आने लगा। फिर कुछ दिनों बाद ठीक होने पर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया।
सीपरी बाजार के कोरोना पॉजिटिव को भी टेस्लीजुमैब इंजेक्शन लगाया गया। चूंकि, इंजेक्शन देने के पहले ही उनकी सेहत काफी खराब हो चुकी थी और एआरडीएस के बदलाव हो रहे थे, इसलिए उन्हें रेमडेसिवीर भी दिया गया। इन दवाओं का असर कुछ समय बाद दिखाई देने लगा। बाद में वह पूरी तरह स्वास्थ्य हो गए। कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।
किस दवा का कितना डोज
रेमडेसिवीर एक एंटीवायरल दवा है। पहले दिन कोरोना मरीज को रेमडेसिवीर इंजेक्शन की 200 एमजी की डोज दी जाती है। इसके बाद अगले चार दिन तक 100-100 मिलीग्राम डोज का इंजेक्षन लगाया जाता है। यह इंजेक्शन कोविड मरीज की हालत गंभीर न हो, इसलिए लगाया जाता है। एक इंजेक्शन की कीमत ढाई से तीन हजार रुपये है। वहीं, टेसिलिजुमैब एक इम्यूनोसप्रेसेंट दवा है। इसका उपयोग आमतौर पर गठिया के इलाज में किया जाता है। यह इंजेक्शन लगातार दो दिन लगाया जाता है। यह गंभीर मरीज में कोरोना वायरस से उत्पन्न जटिलताओं को खत्म करने का काम करता है। इसकी कीमत 40 से 45 हजार रुपये है। इसके अलावा फेवीपिरवीर एंटीवायरल है, जो शरीर में वायरल को फैलने से रोकती है। यह दवा भी वायरस को बेअसर करने का प्रयास करती है। यह कोर्स साढ़े तीन हजार रुपये का पड़ता है।