आपदा में संकट: 25 फीसदी तक महंगे हो गए ऑपरेशन
झांसी। कोरोना काल में ऑपरेशन कराना अब और महंगा हो गया है। पीपीई किट, सैनिटाइजर, वार्डों में बेड कम करने का हवाला देते हुए निजी अस्पतालों ने ऑपरेशन के दाम 25 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। आपदा के दौर में इलाज महंगा होने की मार सीधी मरीजों पर पड़ी है।
महामारी के दौर में से पहले जो ऑपरेशन बीस हजार रुपये में हो जाता था, उसके मरीजों को अब 25 हजार रुपये भुगतान करने पड़ रहे हैं। कोविड प्रोटोकॉल के पालन का तर्क देते हुए नर्सिंगहोमों की तरफ से ऑपरेशन में यह बढ़ोतरी की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि पहले न तो हर ऑपरेशन के बाद ओटी में सैनिटाइजेशन होता था और न ही पीपीई किट पहननी पड़ती थी। इसके अलावा वार्ड में भी अगल-बगल ही मरीजों के बेड पड़े होते थे। कोविड के चलते अब इन सब बातों पर ध्यान दिया जा रहा है। इन सबका खर्च मरीजों पर ऑपरेशन की फीस बढ़ाकर पूरा किया जा रहा है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में कोरोना के मरीज भर्ती होने के कारण दूसरे रोगी वहां जाने से कतरा रहे हैं। इस कारण उन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराना पड़ रहा है।
...तो हर ऑपरेशन पर एक हजार तक खर्च बढ़ा
मास्क, सैनिटाइजर, पीपीई किट के दामों समेत कोविड प्रोटोकॉल से जुड़ी सभी चीजों को मिला भी लिया जाए तो अधिकतम एक हजार रुपये तक का ही खर्च हर ऑपरेशन पर बढ़ा है। ऐसे में यदि किसी ऑपरेशन पर 20 हजार रुपये लगते थे, तो उसके 21 हजार लिए जा सकते थे। सीधे पांच हजार रुपये बढ़ा देना भी समझ से परे है।
किसका-कितना रेट बढ़ा
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ऑपरेशन पहले की फीस अब
प्रोस्टेट 20 हजार (दूरबीन) 25 हजार
सिजेरियन 25 से 30 हजार 30 से 35 हजार
पित्त की पथरी 20 से 25 हजार 25 से 30 हजार
गुर्दे की पथरी 20 से 25 हजार 25 से 30 हजार
अपेंडिक्स 18 से 20 हजार 22 से 25 हजार
हार्निया 15 से 20 हजार 20 से 25 हजार
पाइल्स 10 से 15 हजार 14 से 18 हजार
लगभग 15 प्रतिशत ऑपरेशन का शुल्क बढ़ा है। इसके पीछे कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना है। वहीं, स्टाफ का भी मानदेय बढ़ाया गया है। यदि कोई नर्सिंगहोमों ने जरूरत से ज्यादा पैसे बढ़ाए हैं तो गलत है। जल्द ही आईएमए पदाधिकारियों के साथ बैठक कर इस मामले पर चर्चा की जाएगी। - डॉ. अनु निगम, सचिव, आईएमए झांसी।