यह तो सिर्फ बानगी है। कोरोना काल में जिले में कोरोना महामारी से भले ही पांच मौतें हुईं हों लेकिन पिछले दो महीने के लॉकडाउन के दौरान झांसी में कुल 321 लोग जान गवां चुके हैं। इनमें से कई लोगों की इलाज के अभाव में मौत हो गई तो तो कई लोगों ने खुद ही मौत को गले लगा लिया।
कुछ हादसे का शिकार हो गए। कुछ लोगों ने अपनी आयु पूरी होने पर दम तोड़ दिया। इनमें से कुछ मरीज ऐसे भी रहे जो कोरोना वायरस के चलते अस्पताल जाने से बचते रहे। हालांकि, यह समय सबसे दर्दनाक उनके लिए रहा, जिनका बड़े महानगरों में इलाज चल रहा था और वह जा नहीं सके। झांसी में उपचार की सुविधाओं की कमी और लापरवाही की वे भेंट चढ़ गए।
देश में 25 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा हुई थी। इसके साथ ही किसी के भी बेवजह घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई थी। परिवहन सेवाएं भी बंद कर दी गईं। अस्पतालों की ओपीडी भी बंद करने के निर्देश जारी हो गए। ऐसे में असाध्य एवं बड़ी बीमारियों का शिकार रोगी, जो दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, गुरुग्राम आदि महानगरों में अपना इलाज करा रहे थे, वो फॉलोअप के लिए नहीं जा सके।
वहीं, झांसी में उन्होंने डॉक्टरों को दिखाया तो सुविधाओं के अभाव में कइयों का बेहतर उपचार नहीं हो सका। इसके अलावा कई मामलों में डॉक्टरों ने भी लापरवाही करते हुए मरीजों का उपचार नहीं किया। इन कारणों से झांसी में कई मरीजों की मौत हो गई। वहीं, ब्रेन स्ट्रोक के कई मरीज परिवहन सेवाएं ठप होने से समय से नहीं पहुंच पाए, जो पहुंचे उनमें से कुछ की जांच समय से नहीं हो सकी, इस कारण उनकी मौत हो गई। ब्रेन स्ट्रोक से एक-दो मौत तो जिला अस्पताल में ही देर से पहुंचने के कारण हुई। पिछले दो महीने के लॉकडाउन में झांसी में 321 लोग दम तोड़ चुके हैं।
केस-1
सैंयर गेट निवासी घनश्याम साहू (45) को बीपी की समस्या थी। 15 मई को उनका बीपी लो हो गया तो परिजन दोपहर ढाई बजे उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। घनश्याम के भतीजे दीपक साहू के मुताबिक वह मरीज को लेकर कोविड अस्पताल पहुंच गए। स्टाफ से मरीज को भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ाते रहे लेकिन उन्हें भर्ती नहीं किया गया। दो घंटे तड़पने के बाद घनश्याम की मौत हो गई।
केस-2
नरसिंह राव टौरिया निवासी चमन अग्रवाल की पत्नी सुमन अग्रवाल (56) की 26 मार्च की हालत बिगड़ गई। परिजन आनन-फानन में उन्हें महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज लेकर भागे। चमन अग्रवाल ने आरोप लगाया कि मेडिकल में इलाज में हद दर्जे की लापरवाही बरती गई। पहले ऑक्सीजन लगाने में बहुत देरी की गई। समय से ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से पत्नी की मौत हो गई। मौत के बाद ईसीजी किया गया और इसके तीन सौ रुपये भी लिए गए। चमन ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री के पास भेजी है।
नगर के मुक्तिधाम में दाह संस्कार का आंकड़ा
उनाव गेट - 65
बड़ागांव गेट - 27
श्याम चौपड़ा - 65
नंदनपुरा - 116
प्रेमनगर - 23
हंसारी (दोनों में कुल) - 25
तीन दिन में मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 38 आवेदन
लॉकडाउन के चलते पिछले दो महीने से नगर निगम में जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन बंद चल रहे थे। बीती 27 मई से ही आवेदन खोले गए हैं। तीन दिनों में ही नगर निगम में 38 लोगों ने मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है।
बड़े रोगों से मौत का आंकड़ा
बीमारी मौत
लिवर 12
टीबी 10
किडनी 14
कैंसर 18
ब्रेन स्ट्रोक 20
ह्रदय 22
केस स्टडी
49 ने कर ली आत्महत्या
लॉकडाउन में बाकी अपराध का आंकड़ा भले ही कम हो गया हो लेकिन आत्महत्या की घटनाओं में इजाफा हुआ है। दो महीनों में जिले में 49 लोगों ने आत्महत्या की है। ज्यादातर मामलों में यह पता नहीं चल पाया है कि इन लोगों ने आत्महत्या क्यों की है लेकिन जिन आत्महत्याओं के पीछे का कारण पता चला है, वह चौंकाने वाले हैं। किसी ने लॉकडाउन में घरेलू कलह बढ़ने व डिप्रेशन में आकर, किसी ने नौकरी तो किसी ने अन्य कारणों से जान दी।
ये भी रहे मामले
- रविवार (16 मई) को भी बड़ागांव के एक पूर्व सभासद और एक अन्य व्यक्ति ने पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
- 15 मई को टहरौली में एक मजदूर ने इसलिए आत्महत्या कर ली कि उसकी पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए कोई शामिल होने नहीं आया।
- चार मई को संविदा कर्मी दीपक रायकवार ने दीनदयाल सभागार में नौकरी जाने पर फांसी लगाई।
- 24 अप्रैल को शिवाजी नगर में प्रशांत गंगवार ने लॉकडाउन से परेशान होकर फांसी लगाई थी।
ये रहे कारण
फंदे से लटककर - 9
जहर खाकर - 7
आग लगाकर - 6
ट्रेन के सामने कूदकर - 7
एसिड पीकर - 4
घरेलू कलह - 11
बीमारी से परेशान होकर - 5