झांसी। लॉकडाउन की वजह से समाज के एक बड़े तबके के सामने आजीविका का संकट गहरा गया है। ऐसे में उन्हेें अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में ही पसीना आ रहा है, उस पर पाठ्य-पुस्तकों की बिक्री में भी जमकर मनमानी हो रही है। किताबों के साथ महंगी कापियां व स्टेशनरी अनिवार्य रूप से लेनी पड़ रही है। अभिभावकों पर ऊंचे दामों पर स्कूलों द्वारा तय की गई दुकानों से कोर्स खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।
कोरोना वायरस के संक्रमण के नियंत्रण के लिए लागू किए गए लॉकडाउन से कारोबार और रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। तमाम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में ही पसीना आ रहा है। बावजूद, स्कूलों की ओर से ऐसे अभिभावकों को कोई खास रियायत नहीं दी जा रही है। फीस तो उनसे पूरी ली ही जा रही है। उस पर किताबों की बिक्री में भी जमकर मनमानी हो रही है। किताबों की कीमतों में रियायत देने की बात तो दूर अभिभावकों को ऊंचे दामों पर कापियां व स्टेशनरी खरीदने का भी दबाव बनाया जा रहा है। कॉपी व स्टेशनरी लेने में आनाकानी करने वाले अभिभावकों को किताबें भी नहीं दी जा रही हैं। स्कूलों द्वारा तय की गई दुकानों से ही अभिभावकों को किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। इसमें कमीशनखोरी की भी बू आ रही है।
विरोध में लामबंद हुए संगठन
झांसी। किताबों की बिक्री में हो रहे खेल के विरोध में विभिन्न संगठन लामबंद हो गए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने इस मसले पर डीएम को संबोधित ज्ञापन दिया, जिसके जरिये बताया कि किताबों के साथ दो हजार रुपये तक की कॉपियां खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। कॉपियां खरीदने से मना करने पर किताबें नहीं दी जा रही है। विद्यार्थी परिषद ने कार्रवाई की मांग की। वहीं, बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रसकेंद्र गौतम ने भी प्रशासन ने इस ओर ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद से ही कई अभिभावकों ने कॉपियों का इंतजाम कर लिया था। लेकिन, पुस्तक विक्रेता दुबारा से उन पर कॉपियां लेने का दबाव बना रहे हैं। कॉपी नहीं लेने पर किताबें भी नहीं दे रहे हैं।
पुस्तक विक्रेताओं की मनमानी की शिकायत आई है। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वाणिज्य कर विभाग को भी इसकी सूचना दी जा रही है। अभिभावकों को शोषण करने वाले विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई होगी।
- कोमल सिंह यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक