झांसी। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद समय पर भुगतान न होने और एफडी फंसने से परेशान ठेकेदारों ने नगर निगम से मुंह फेर लिया है। नगर निगम में इस बार ठेकेदारों ने पिछले साल के मुकाबले कम पंजीकरण कराए हैं। ठेकेदार काम न मिलने और धनराशि फंसने से पंजीकरण न कराने की बात कह रहे हैं। वहीं नगर निगम अधिकारी कोरोना को पंजीकरण कम होने का कारण बता रहे हैं।
नगर निगम में निर्माण कार्यों को कराने के लिए हर साल ठेकेदार पंजीकरण कराते हैं। इसमें ठेकेदारों को चरित्र प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र और जीएसटी प्रमाण के साथ श्रेणीवर तय शुल्क जमा करना होता है। नगर निगम प्रमाण पत्रों की जांच कर ठेकेदार को पंजीकरण प्रमाण पत्र देता है। इस बार भी ठेकेदारों के पंजीकरण का सिलसिला चला, लेकिन पंजीकरण कराने की वालों की संख्या कम रही। पिछले साल तक सभी श्रेणियों में करीब 220 ठेकेदार पंजीकृत थे, लेकिन इस बार आंकड़ा घटकर 150 तक रह गया है। ठेकेदारों का कहना है कि निर्माण कार्य का समय पर भुगतान न होना और एफडी समय पर न मिलने से ठेेकेदारों का मोह भंग हो रहा है। ठेकेदार अपने भुगतान के लिए चक्कर काटते रहते हैं। इसके साथ ही प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भी तमाम ठेकेदारों को काम ही नहीं मिल पाता। जबकि ठेकेदार को कागजी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। ऐसे में अब अन्य संस्थानों की ओर ठेकेदार रुख कर रहे हैं। वहीं नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल के चलते पंजीकरणों में कमी आई है।
समय पर भुगतान होता नहीं है। तमाम ठेकेदारों की एफडी तीन-तीन साल से फंसी हुई है। जबकि एक साल में एफडी वापस करने का नियम है। इसके अलावा जीएसटी की प्रक्रिया और काम मिलने में कड़ी प्रतियोगिता के चलते ठेकेदार पंजीकरण नहीं करा रहे हैं। - बाल स्वरूप साहू, अध्यक्ष ठेकेदार एसोसिएशन नगर निगम
इस बार पंजीकरण ठीक हुए हैं। 10-15 नए पंजीकरण भी हुए हैं। काम पूरा होने के बाद समय पर भुगतान किया जाता है। अगर कोई तकनीकी दिक्कत होती है, तो भुगतान में देरी हो जाती है। एफडी भी वापस की जा रही हैं। एलएन सिंह, मुख्य अभियंता नगर निगम