झांसी। मंगलवार को भोजला मंडी के सामने ट्रांसफार्मर से कनेक्शन कर रहे एक बिजली संविदा कर्मचारी की करंट लगने से मौत हो गई। संविदा बिजली कर्मचारी एक आटा मिल का कनेक्शन करने गया था।
ग्राम केशवपुर निवासी श्याम लाल लोधी का पुत्र दिनेश राजपूत (32) बिजली विभाग में संविदा कर्मचारी के तौर पिछले पंद्रह साल से काम कर रहा था। भोजला मंडी के पास उन्नाव बालाजी मार्ग पर एक व्यक्ति ने नया मकान बनवाया है। वह वहां पर आटा मिल लगाना चाहता है। इसके लिए उसने बिजली विभाग में आवेदन देकर अपने मकान के पास नया ट्रांसफार्मर लगवाया है। वह पिछले तीन दिन से संविदा कर्मचारी से ट्रांसफार्मर से कनेक्शन जोड़ने की बात कर रहा था। संविदा कर्मचारी व्यस्तता होने की बात कहकर आजकल का आश्वासन दे रहा था। आखिरकार मंगलवार की सुबह वह ट्रांसफार्मर से कनेक्शन जोड़ने के लिए सुबह करीब साढ़े सात बजे घर से निकल गया।
संविदा कर्मचारी दिनेश ट्रांसफार्मर पर चढ़कर तार जोड़ रहा था कि अचानक उसे करंट लगा और वह झटका खाकर नीचे गिर पड़ा। जमीन पर एक बड़ा पत्थर पड़ा था, वह उसी पत्थर पर गिरा। इससे आसपास के लोग दौड़े। वहां पर भीड़ लग गई। लोगों ने माजरा समझा तो मकान स्वामी को घेर लिया। उससे धक्का- मुक्की शुरू हो गई। सूचना मिलने पर भोजला मंडी चौकी पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने लोगों को समझाया तो मामला शांत हो गया। संविदा कर्मचारी दिनेश को उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। चौकी प्रभारी ने बताया यदि मृतक के परिवार की ओर से एफआईआर दी जाएगी तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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रामायण छोड़कर गया था
मृतक दिनेश के परिवार में मंगलवार की सुबह रामायण का आयोजन था। परिजनों ने उसे मना किया कि रामायण का पूजन शुरू हो जाए, इसके बाद जाना। लेकिन नहीं माना और चला गया। इसके बाद उसकी मौत की सूचना आई। परिजनों का कहना था कि यदि रामायण शुरू होने तक रुक जाता तो शायद मौत भी अपना रास्ता बदल लेती।
परिवार का एक ही सहारा था
मृतक दिनेश अपने पिता का एकमात्र सहारा था। मृतक के तीन छोटे- छोटे बच्चे हैं। इनमें से एक बेटी हिमांशी छह साल की है और दो बेटों में जय हिंद चार साल और रेयांश दो साल का हैै। बच्चों को यह भी नहीं मालूम की मौत क्या होती है। मृतक के घर में सभी लोग रो रहे थे, जबकि बच्चे खेल रहे थे।
कच्चे घर में है आशियाना
मृतक की माली हालत अच्छी नहीं है। वृद्ध पिता श्याम लाल ने बताया कि रहने के लिए कच्चा घर है। खेती नाममात्र की है। परिवार का गुजारा करने के लिए दिनेश एकमात्र सहारा था, अब वह सहारा भी छिन गया। अब उनके समझ में नहीं आ रहा है कि परिवार का गुजारा कैसे होगा।
संविदा कर्मचारी की मौत हुई है। एफआईआर और पोस्टमार्टम कराने के बाद नियमानुसार जो भी संभव होगा, उसकी मदद की जाएगी।
- शैलेंद्र कटियार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण