झांसी। लॉकडाउन में शहर के कई लोगों के हाथों से काम छीन गया। इनमें कोई मजदूरी तो कोई फुटपाथ पर दुकान लगाता था। कई दुकानदार व कंपनियों ने अपने अपंजीकृत स्टाफ को वेतन नहीं दिया। यही कारण है कि मई में 38 हजार उपभोक्ता बिजली का बिल भी जमा नहीं कर सके। वहीं, बिजली अधिकारी कम राजस्व मिलने से चिंतित है।
शिवाजी नगर में रहने वाले महेश वर्मा एक डिपार्टमेंटल स्टोर में काम करते हैं। लॉकडाउन में डिपार्टमेंटल स्टोर बंद रहा। इस अवधि में संचालक ने उनको वेतन नहीं दिया। उनको घर का खर्च तक चलाना मुश्किल हो रहा है। मई में बिजली का बिल भी तीन महीने का इकट्ठा 2800 रुपये आ गया। आर्थिक तंगी के कारण वे मई में बिल नहीं भर सके। यह तो एक उदाहरण है। महानगर में हजारों परिवार ऐसे हैं जिनका लॉकडाउन में हाथ से काम छीन गया। इसमें मजदूर, फुटपाथी दुकानदार, इलेक्ट्रिीशियन, प्लंबर, ठेेलों पर खानपान सामग्री बेचने वाले, माली, दूसरों की दुकानों पर काम करने वाले समेत अन्य कार्य शामिल हैं।
यही कारण है कि मई में 38 हजार से अधिक उपभोक्ता मई में अपना बिजली का बिल जमा नहीं कर सके। महानगर में मई में 116396 उपभोक्ताओं के बिल बनने थे, जिसमें 100799 को बिल जारी किए गए। इसमें 62158 ने ही अपने तय समय में बिल जमा किए। इन उपभोक्ताओं से 25 करोड़ राजस्व प्राप्त किया गया। वैसे एक महीने में विभाग को 35 से 36 करोड़ रुपये राजस्व मिलता है। अप्रैल में 27396 उपभोक्ताओं ने बिल जमा किए थे और राजस्व 11 करोड़ मिला था।
- बिजली बिल माफ करने का कोई आदेश नहीं आया है। वैसे मुख्य अभियंता को चार, अधीक्षण अभियंता को तीन और अधिशासी अभियंता को दो किस्तों में बिल राशि जमा कराने का अधिकार है। उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। मगर पहली किस्त में कम से कम 60 प्रतिशत राशि उनको जमा करनी होगी। उपभोक्ताओं में भ्रांति फैल गई है कि तीन महीनों की इकट्ठी यूनिट के हिसाब से जो बिल बनकर आए हैं उनको उसी टैरिफ के हिसाब से बनाया गया है। यह गलत है। यूनिट को तीन भागों में विभाजन के बाद ही उसमें टैरिफ लगाया गया है।
डी यादवेंदु, अधिशासी अभियंता (प्रथम)।