झांसी। कोरोना संक्रमण के दौर में शासन के निर्देश पर महानगर के हर वार्ड में निगरानी समिति का गठन किया गया है। लेकिन महानगर में निगरानी समितियों के अध्यक्ष बनाए गए पार्षदों को निगरानी समिति के कामों की ही जानकारी नहीं है। इसकी पोल जिले में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए शासन से नामित नोडल अधिकारी द्वारा फोन पर की गई पड़ताल में खुल गई। इसमें कई पार्षदों ने निगरानी समिति के बारे में जानकारी होने से इनकार कर दिया।
शासन ने कोरोना दौर में हर वार्ड में निगरानी समिति का गठन करने के निर्देश दिए थे। जिसमें वार्ड के पार्षद को अध्यक्ष, आशा, एएनम, सिविल डिफेंस कर्मी, सफाई निरीक्षक, सफाई हवलदार को सदस्य बनाया गया है। निगरानी समिति का काम है कि वह वार्ड में बाहर से आने वालों की जानकारी कर उनको होम क्वारंटीन कराने, कोरोना संक्रमण के प्रति जागरूकता फैलाने, घरों में होम क्वारंटीन स्टीकर लगवाने और संदिग्ध की जानकारी कर कंट्रोल रूम को सूचना देकर सैंपल निकलवाने होता है। जिले के नोडल अधिकारी और विशेष सचिव आईएएस डॉ. अबरार अहमद ने पिछले दिनों निगरानी समिति के अध्यक्षों को फोन कर समितियों के कामों की जानकारी चाही। इस दौरान 12 से अधिक पार्षदों ने फोन पर निगरानी समिति के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। जिस पर नोडल अधिकारी ने नगर आयुक्त को रिपोर्ट भेजकर समितियों को सक्रिय कराने के निर्देश दिए। इसे लेकर शनिवार को अपर नगर आयुक्त शादाब असलम ने सभी सफाई निरीक्षकों की बैठक बुलाई। जिसमें हर सफाई निरीक्षक को पार्षदों और अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए। साथ ही व्हाट्सएप ग्रुप पर फोटो उपलब्ध कराने के लिए कहा गया।
महानगर में 60 निगरानी समितियां बनाई गई हैं। जिनको कोरोना संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने और निगरानी करने का जिम्मा सौंपा गया है। नोडल अधिकारी की पड़ताल में कुछ समितियों की निष्क्रियता की स्थिति सामने आई थी। जिसे लेकर सफाई निरीक्षकों और सफाई हवलदारों को निर्देश दिए गए हैं।
शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त