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चालक गिरफ्तार, हत्या की बात स्वीकारी

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चालक गिरफ्तार, स्वीकारा संजय ने की मीना की हत्या
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झांसी। थाना नवाबाद क्षेत्र से गायब मीना सोेनी के मामले में नया मोड़ आया है। कारोबारी संजय वर्मा के पकड़े गए चालक ने पुलिस को महिला की हत्या करने की जानकारी दी है। हालांकि शव पुलिस के हाथ नहीं आ सका। पुलिस ने संजय वर्मा को हिरासत में लेने की तैयारी शुरू कर दी है। उसके हिरासत मेें आने के बाद इस घटना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां पुलिस के हाथ आ सकेंगी।
एसएसपी डॉ. ओपी सिंह नेे बताया कि तालबेहट निवासी श्यामलता सोनी ने कोतवाली के वासुदेव निवासी संजय वर्मा पर उनकी पुत्री का अपहरण कर दुबई ले जाने की रिपोर्ट दर्र्ज कराई थी। महिला का सुराग लगाने के लिए नवाबाद प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह, सर्विलांस प्रभारी व थानाध्यक्ष विजय कुमार पांडेय व स्वॉॅट टीम प्रभारी जितेंद्र सिंह तक्खर की टीम को लगाया था। पुलिस टीमों द्वारा की गई पड़ताल के बाद बृहस्पतिवार को पुलिस टीम ने कोतवाली के ऋषिकुंज स्कूल के पास स्थित बिसातखाना निवासी योगेश कुमार को पकड़ा। जिससे की गई पूछताछ में आरोपी ने संजय वर्मा द्वारा हत्या किए जाने की बात स्वीकार की है। एसएसपी ने बताया कि तालबेहट स्थित निवासी स्व. रामजीलाल सोनी की पुत्री मीना सोनी वर्तमान में थाना नवाबाद क्षेत्र में रहकर सामाजिक संगठन से जुड़ी थीं। कुछ साल पहले उनकी मुलाकात कोतवाली के वासुदेव निवासी संजय वर्मा से हुई। जहां धीरेे - धीरे दोनों की मुलाकात प्यार में बदल गई। संजय वर्मा ने दस हजार रुपये मासिक किराए पर मीना को योगेश प्रेमानी के झोकन बाग स्थित मकान में रख दिया।
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कुछ समय बीतने के बाद मीना शादी की जिद संजय से करने लगी। संजय उसके पुत्र व पुत्री की शादी हो जाने के बाद अपनाने की बात करने लगा। बताया गया कि इस दौरान मीना गर्भवती भी र्हुई, जिस पर उसका गर्भपात भी कराया गया।
मीना से संबंध व खर्चा करने की जानकारी संजय की पत्नी को भी लग गई। जिसके चलते दोनों के मध्य तकरार भी शुरू हो गई। इसी बीच संजय ने प्रेमानी का उक्त मकान खाली कराने के बाद छावड़ी बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में रखवा दिया। यहां भी लगातार संजय का आना - जाना मीना के पास लगा रहा। कुछ समय गुजर जाने के बाद पुन: मीना शादी करने की जिद करने लगी। संजय के दूरी बनाने पर मीना ने फेसबुक पर तकरार को उजागर किया। इसकी जानकारी संजय को लगते ही वह विचलित हो उठा और उसे ठिकाने लगाने की योजना तैयार शुरू कर दी। इसके लिए उसने अपने ड्राइवर थाना कोतवाली के बिसातखाना निवासी योगेश गुप्ता से पूरे मामले को साझा कर ठिकाने लगाने की रणनीति तैयार की। इसके एवज में उसे आर्थिक लाभ का लालच भी दिया गया।
दोनों ने तय किया कि मीना के घर सूचना पहुंचाएंगे कि उसको दुर्बई घुमाने ले जा रहे हैं। इस दौरान संजय मोबाइल नहीं रखेगा, ड्राइवर योगेश ही मोबाइल रखेगा। योजना के तहत 23 मार्च को संजय ने योगेश को घर बुलाया। यहां पहुंचने पर उसको बताया गया कि रात में साढ़े तीन बजे मीना के घर आ जाए, यहां से तीनों निकलेंगे। सुबह 4 बजे ड्राइवर के कार लेकर आने के बाद वे दिल्ली के लिए निकल पड़े। सुबह मथुरा पहुंचने पर एक ढाबे पर रुके। यहां शादी कराने को लेकर दोनों के बीच विवाद होने लगा। किसी तरह संजय उसे मनाकर दिल्ली लेकर पहुंचा। यहां अपोलो हॉस्पिटल के पीछे एक होटल में तीनों ठहरे। यहां से खाना खाकर गाड़ी की चाबी लेकर संजय चालक को रुकने की कहकर मीना को अपने साथ ले गए। इसके बाद मीना का कुछ पता नहीं चला। 26 मार्च की रात होटल से चेकआउट कर दोनों होटल से बाहर लौटकर झांसी आने लगे। दिल्ली से कुछ किलोमीटर निकलने पर संजय ने कार रुकर्वाई और मीना का दुपट्टा निकालकर ड्राइवर को देकर सड़क के पास छिपा दिया। उसने चालक से कहा कि सहयोगियों की मदद से मीना को मारकर यमुना में बहा दिया है। खुलासे में एसपी सिटी श्रीप्रकाश द्विवेदी व सीओ सिटी अभिषेक कुमार राहुल मौजूद रहे।
टीम मेें यह रहे शामिल
नवाबाद प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह, सर्विलांस प्रभारी व थानाध्यक्ष विजय कुमार पांडेय, स्वॉॅट टीम प्रभारी जितेंद्र सिंह तक्खर, राजीव सिंह, उपनिरीक्षक शिवजीत सिंह, योगेंद्र चौैहान, विमलेंदर, शैलेंद्र चौैहान, पदम गोेस्वामी, प्रदीप सेंगर, दुर्गेश चौहान, मनोज कुमार, रमेश त्रिवेदी, गिरेंद्र सिंह, विमलेश सिंह व शिवकरण मौजूद रहे।
फर्जी पहचान पत्र से ठहरे थे होटल में
घटना को बड़ी चालाकी से अंजाम दिया गया। दिल्ली के जिस होटल में संजय व मीना ठहरे थे, वह पुलिस की जांच में फर्जी निकले। फोटो सही थी, बल्कि नाम गलत थे। पुलिस को धोखा देने के लिए पहचान पत्र दूसरे के नाम से लगाए गए थे। वहीं, जिस कार से दोनों दिल्ली आए थे, उसकी नंबर प्लेट को भी बदल दिया गया था, ताकि आगे किसी भी तरह की जांच में फंस न सकें।
पुलिस व परिजनों को किया गुमराह
मीना का मोबाइल संजय के पास आ गया था। वह व्हाट्सएप के जरिए परिजनों से मीना बनकर भी बात करता रहा। चालाकी दिखाते हुए संजय ने र्कई फोटो के बैकग्राउंड बदलकर दुबई का लुक दिया। इसे देखकर परिजन भी धोखा खा गए थे, लेकिन बात न होने के कारण उनका शक लगातार बदलता जा रहा था। पुलिस से शिकायत के बाद मोबाइल नंबर भी बंद हो गया था। इसके बाद पुलिस ने पड़ताल तेज कर दी थी।
खाता निकला फर्जी, खाताधारक तीन साल से लापता
बताया गया है कि मीना के नाम से जो खाता खोला गया था वह फर्जी निकला। उसके लापता होने के बाद से ही खाते से करीब ढाई से तीन लाख रुपये निकाले गए। पुलिस ने जब खाते की जांच करने के बाद वह खाताधारक के घर पहुंची तो पता चला कि उक्त व्यक्ति तीन साल से लापता है। परिजन लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए हैं। पुलिस को शक है कि यह खाता भी संजय वर्मा चला रहा है।
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चिकित्सक पर भी था शक
बताया गया है कि दिल्ली के एक चिकित्सक से मीना का इलाज भी चल रहा था। समय - समय पर वह चिकित्सक से बात भी करती थी। कॉल डिटेल निकाले जाने के बाद पुलिस को चिकित्सक पर शक गहराने लगा। पुलिस की पड़ताल में दूध का दूध और पानी का पानी हो सका।
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