झांसी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की पहल से राजमार्गों पर यात्रियों की सुविधा के लिए क्यूआर कोड सेवा शुरू की है। टोल और रूट के साथ अन्य सुविधाओं के लिए डिजिटल इंडिया के तहत क्यूआर कोड जारी किया गया है। इसके स्कैन करते ही सभी जानकारी मोबाइल पर मिल जाएगी।
झांसी-कानपुर हाईवे की तर्ज पर झांसी-ललितपुर हाईवे पर क्यूआर कोड लगाने का काम अंतिम चरण में है। राजमार्गों के किनारे लगे क्यूआर कोड साइन बोर्ड मोबाइल फोन में स्कैन होते ही सटीक जानकारी देंगे। इससे वाहन स्वामियों को सफर के दौरान जरूरत की सभी जानकारी फोन पर उपलब्ध हो सकेगी। झांसी से होकर ललितपुर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर क्यूआर कोड के साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं। अन्य स्थानों पर जल्द ही लगाए जाने के लिए कार्य किया जा रहा है।
एनएचएआई अफसरों की माने क्यूआर कोड लगाने का मकसद यात्रियों को रोड पर मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देना है। इसके साथ ही आपात कालीन हेल्पलाइन नंबर 1033 तुरंत उपलब्ध कराना है। जहां-जहां साइन बोर्ड लगा दिए गए हैं, व जानकारी यात्री स्कैन कर प्राप्त कर सकते हैं। झांसी-ललितपुर हाईवे पर 32 स्थानों को चिह्नित कर क्यूआर कोड साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
यह जानकारी मिलेगी
हाईवे के किनारे पोल पर लगे क्यूआर कोड साइन बोर्ड को स्कैन करने पर यात्रियों को हाईवे से जुड़ी खास जानकारी मिलेगी। इसमें हाईवे का नंबर, हाईवे की दूरी और लोकेशन, हाईवे पर पेट्रोलिंग वाहन का संपर्क नंबर शामिल है। इसके अलावा टोल मैनेजर, रेजिडेंट इंजीनियर का नंबर, आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर की जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए यात्रियों को क्यूआर कोड स्कैन करना होगा।
क्यूआर कोड के लिए स्थल चिह्नित
क्यूआर कोड के लिए एनएचएआई ने हाईवे पर उन्हीं स्थलों को चिह्नित कर साइन बोर्ड लगाए हैं, जहां यात्रियों की किसी जानकारी की जरूरत पड़ सकती है। टोल प्लाजा और ट्रक ले-बाइ एरिया, वे साइड सुविधाएं (रेस्ट एरिया), हाईवे की शुरूआत और छोर के अलावा जरूरी जगहों पर लगे अन्य साइनबोर्ड के पास वाले स्थान को शामिल किया गया है।
सुरक्षा को बढ़ावा
क्यूआर कोड साइनबोर्ड सड़क सुरक्षा को बढ़ाने में मदद करेंगे। इससे यात्रियों को तुरंत इमरजेंसी नंबर और स्थानीय जानकारी मिलेगी। इसके अलावा, इसमे नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले लोगों का अनुभव और जागरूकता दोनों बेहतर होंगे। इसके लिए यात्रियों को बस मोबाइल से क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा।
-मनोज कुमार, परियोजना निदेशक एनएचएआई झांसी