दवा कंपनियों द्वारा किस हद तक लोगों के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरती जा रही है, इसका एक उदाहरण यह है कि एक कंपनी द्वारा वर्ष 2015 में ही दवा के रैपर पर निर्माण तिथि वर्ष 2016 प्रिंट करा कर बाजार में उतार दी गई। शिकायत पर सोमवार को खाद्य एवं औषधि विभाग (एफडीए) ने न्यू रोड स्थित एसके एजेंसी पर छापेमारी की तो उक्त दवा तो नहीं मिली लेकिन इस बात की पुष्टि हो गई कि कंपनी के स्तर से यह गलती हुई। इस पर टीम ने उक्त कंपनी द्वारा सप्लाई की जा रही दस अन्य दवाओं के नमूने लिए गए जिन्हें जांच के लिए लखनऊ भेजा जाएगा।
खाद्य एवं औषधि विभाग को शिकायत मिली कि विशाल फार्मा इंदौर द्वारा निर्मित दर्द निवारक दवा फ्लेम नाम की टेबलेट की मैन्यूफैक्चरिंग तिथि अप्रैल 2016 डाल कर मार्केट में भेज दी गई है। न्यू रोड स्थित एजेंसी पर छापेमारी के दौरान जांच टीम को उक्त दवा तो नहीं मिली लेकिन जांच के दौरान कंपनी का एक पत्र मिला जिसमें लिखा था कि भूलवश दर्द निवारक टेबलेट में तिथि व वर्ष गलत छप गया है, भेजी गई दवाओं का कार्टून वापस कर दिया जाए। एजेंसी संचालक ने बताया कि दवाओं का कार्टून कंपनी को वापस कर दिया गया है। इस मौके पर टीम ने उक्त कंपनी द्वारा निर्मित दस अन्य दवाओं के नमूने लिए। ड्रग इंस्पेक्टर अतुल उपाध्याय ने बताया कि कंपनी ने भूल सुधार कर ली है। बावजूद, कंपनी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए ड्रग कंट्रोलर लखनऊ को पत्र लिखा जाएगा। इस मौके पर सहायक आयुक्त औषधि एसके चौरसिया, प्रदीप कुमार, राजकुमार शामिल रहे।